इस रोक को हटाने के लिए वर्षा ने मई में हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। उसने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से लगाई गई रोक हटाई जाए। ताकि वह अपने दोस्त को किडनी दे सके। हाई कोर्ट ने केवल एक दिन में ही इस पर फैसला सुना दिया। इसके लिए एक कमिटि भी बनाई गई जिसने वर्षा को एक महीने के अंदर ही किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति दे दी।
प्यार में की किडनी डोनेट
कमिटि के चेयरपर्सन डॉ. भानू मूर्ति ने कहा कि वर्षा के इस फैसले का उसकी बहन विरोध कर रही थी। उसी ने कमिटि को इस ट्रांसप्लांट के विरोध में पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि वर्षा बालिग है और वह पहले ही पैनल के सामने अपना पक्ष रख चुकी है। किडनी ट्रांसप्लांट में पैसे का लेन देन नहीं हुआ। वर्षा ने सिर्फ प्यार में अपने दोस्त को किडनी दी है।