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बचपन में ही दर्द देने लगी पीठ: हर 10 में चार बच्चे परेशान; मोबाइल-कंप्यूटर मासूमों को बना रहे बीमार

सार

पुणे के भारती विद्यापीठ मेडिकल कॉलेज के अध्ययन में 9 से 16 साल के 1,225 बच्चों में से 38.5% ने पीठ दर्द की शिकायत की। शहरी बच्चों में यह आंकड़ा 43.4% रहा, जबकि ग्रामीण बच्चों में 33.2% बच्चे इससे प्रभावित मिले।  
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पीठ दर्द को आमतौर पर बढ़ती उम्र या घंटों काम करने से जुड़ी परेशानी माना जाता है, लेकिन अब कम उम्र के बच्चों में भी इसकी शिकायत सामने आ रही है। 10 स्कूलों में 1,225 बच्चों पर किए गए एक नए अध्ययन में करीब हर 10 में से चार बच्चों ने पीठ दर्द की बात कही। शहरी बच्चों में यह परेशानी ग्रामीण बच्चों के मुकाबले ज्यादा मिली। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण मोबाइल और कंप्यूटर का ज्यादा यूज बताया गया। भारती विद्यापीठ (डीम्ड यूनिवर्सिटी) मेडिकल कॉलेज, पुणे के चिकित्सकों ने यह अध्ययन किया।

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शहरी बच्चों में पीठ दर्द की शिकायत ज्यादा
शोध में शामिल बच्चों की उम्र करीब 9 से 16 साल के बीच थी। इनमें 38.5 फीसदी बच्चों ने पीठ दर्द की शिकायत बताई। शहरी बच्चों में यह आंकड़ा 43.4 फीसदी रहा, जबकि ग्रामीण बच्चों में 33.2 फीसदी बच्चों ने दर्द की बात कही। यानी अध्ययन में शहरों के बच्चों में पीठ दर्द की शिकायत ज्यादा दर्ज हुई।

मोबाइल-कंप्यूटर का इस्तेमाल भी दर्द से जुड़ा
अध्ययन में रोजाना कम से कम 60 मिनट मोबाइल इस्तेमाल करने और कंप्यूटर के उपयोग का संबंध पीठ दर्द से मिला। बच्चों का लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां भी इस समस्या को बढ़ा रहीं हैं। इसलिए बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल के साथ उनकी शारीरिक गतिविधि और बैठने के तरीके पर भी ध्यान देना जरूरी है।
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पुरानी चोट और परिवार में दर्द का इतिहास भी अहम
शोध में पहले लगी चोट और परिवार में पीठ दर्द का इतिहास भी शिकायत से जुड़े कारकों में शामिल रहे। कुछ मानसिक और व्यवहार संबंधी कठिनाइयों का संबंध भी पीठ दर्द से देखा गया। इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के चीफ डायरेक्टर डॉ. कालीदत्त दास कहते हैं, 'रीढ़ की हड्डी शरीर को सहारा देने और चलने-फिरने सहित कई गतिविधियों में अहम भूमिका निभाती है। कम उम्र में पीठ दर्द की शिकायत बच्चों के खेल, पढ़ाई और रोजमर्रा के काम को प्रभावित कर सकती है। अगर बच्चे को बार-बार दर्द हो, दर्द बना रहे या उसकी सामान्य गतिविधियां प्रभावित हों तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। केवल कम उम्र होने के कारण इस परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।' डॉ. दत्त के अनुसार, रीढ़ की हर समस्या के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं होती। बहुत से मामलों में समय पर जांच, नियमित व्यायाम, सही पोस्चर, वजन को नियंत्रित रखना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार, फिजियोथेरपी से समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

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