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आनन फानन में लांच हुई आयुष्मान भारत योजना, दिल्ली के बड़े अस्पतालों में नहीं मिल रही सुविधा

Thu, 27 Sep 2018 03:43 PM IST
हरेन्द्र, नई दिल्ली
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ayushman bharat - फोटो : SELF
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देश की राजधानी दिल्ली के एम्स, सफदरजंग, आरएमएल और लेडी हार्डिंग जैसे चार प्रमुख अस्पताल आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा योजना के लिए फिलहाल तैयार नहीं दिखते। सरकार की इस फ्लैगशिफ योजना को लेकर देश के जाने-माने चारों अस्पताल में उदासीनता साफ दिखाई दे रही है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयुष्मान भारत की कोई हेल्पडेस्क नजर नहीं आई तो अन्य तीनों अस्पतालों में भी इसका कोई प्रचार- प्रसार नहीं दिख रहा है। यहां तक पोर्टल पर मरीजों के नाम ढूंढने पर नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते लाभार्थियों का न तो आष्युमान भारत गोल्ड कार्ड बन पा रहा है और न ही सुविधा का कोई मरीज लाभ पाने में सक्षम है।
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मरीजों से योजना के बारे में पूछने पर वह कुछ नहीं बता सके। दिल्ली के इन चारों अस्पतालों में दिल्ली क्या देश के कोने-कोने से हर रोज हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। आयुष्मान योजना को देश के कई राज्यों में लागू हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन जब दिल्ली के प्रमख अस्पताल की यह स्थिति है तो पूरे देश का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
 
पेश है इन अस्पतालों में योजना की तैयारियों की ग्राउंड रिपोर्ट

राम मनोहर लोहिया

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा योजना का जायजा लेने सबसे पहले दिल्ली के प्रसिद्ध आरएमएल पहुंचे तो, वहां इस योजना का कोई प्रचार प्रसार नहीं दिखा। न कोई पोस्टर और न ही बैनर। पूछताछ काउंटर पर पूछने पर पता चला कि पास में ही योजना का काउंटर है। काउंटर पर खड़े पवन शर्मा और ज्योति ने बताया कि वे बीपीएल कार्ड धारक है, लेकिन उनका नाम सॉफ्टवेयर में नहीं है। हालांकि आरएमएल अस्पताल का नेशनल हेल्थ एजेंसी के साथ एमओयू पहले ही साइन हो चुका है। लेकिन योजना को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई दी।
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सॉफ्टवेयर में ढूंढे नहीं मिलते नाम

अस्पताल सूत्रों ने बताया कि 17 सितंबर को काउंटर शुरू किया गया था। रोज वहां 10 से 15 लोग लाभार्थी सूची में अपना नाम पता करने के लिए आते हैं, लेकिन आज तक एक भी नाम नहीं मिला। जिसके चलते अभी तक किसी को गोल्ड कार्ड जारी नहीं हुआ है। आमजन में भी योजना को लेकर कोई जानकारी ही नहीं है, यहां तक कि उनके कई सवालों का जवाब आयुष्मान मित्र के पास भी नहीं होता। हालांकि जब इस बारे में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. वीके तिवारी से संपर्क करने की कोशिश की, तो वे मीटिंग में व्यस्त मिले।
 

नरेंद्र मोदी
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल

लेडी हार्डिंग में भी योजना को लेकर कोई बैनर-पोस्टर नहीं दिखाई दिया। यहां अस्पताल प्रशासन ने स्टाफ को आयुष्मान भारत की ट्रेनिंग देकर आयुष्मान मित्र बना दिया है। अस्पताल में काफी खोजने पर योजना का काउंटर दिखाई दिया, लेकिन उनका कंप्यूटर अभी तक सॉफ्टवेयर से कनेक्ट ही नहीं हुआ है, जिसके चलते लोगों को मायूस हो कर लौटना पड़ रहा है।

अस्पताल सूत्रों ने बताया कि यहां पहले से मरीजों की काफी भीड़ रहती है। ऐसे में इस  योजना के लाभार्थियों को कहां से जगह देंगे। उनका कहना है कि आधी अधूरी तैयारियों के साथ इस योजना को लांच कर दिया गया है। अस्पताल के अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)

यहां के हालात बेहद चौंकाने वाले नजर आए। देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान में कोई आयुष्मान भारत योजना के बारे में बताने वाला ही नहीं मिला। यहां तक कि स्टाफ को भी इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। रोगी स्वागत केन्द्र में नए मरीजों का रजिस्ट्रेशन होता है, लेकिन वहां भी कोई इस योजना से परिचित नहीं था। एम्स ने मंगलवार को ही नेशनल हेल्थ एजेंसी के साथ एमओयू साइन किया था।

जिसके बाद एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने दावा किया था कि एम्स में आयुष्मान भारत स्कीम के तहत मरीजों को इलाज मिलना शुरू हो जाएगा। दावों के इतर न तो कोई जानकारी मुहैया कराई जा रही है। मजेदार बात है कि इस योजना को बनाने में एम्स के डॉक्टरों ने अहम भूमिका निभाई है। वहां आए एक मरीज सुरेश कुमार ने बताया कि वह बीपीएल धारक है, योजना के बारे में सुना तो यहां इलाज के लिए चला आया, लेकिन यहां तो किसी को कुछ पता ही नहीं है। जबकि एम्स के निदेशक डॉ. गुलेरिया  संपर्क किए जाने पर बैठक में व्यस्त मिले।
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ayushman bharat
सफदरजंग हॉस्पिटल

नेशनल हेल्थ एजेंसी के साथ सफदरजंग अस्पताल एमओयू साइन कर चुका है। रजिस्ट्रेशन डेस्क पर सबसे आखिर में आयुष्मान भारत का काउंटर दिखाई दिया। काउंटर पर तीन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन कांउटर खाली था। वहां भी कई मरीज योजना के बारे में जानना चाहते थे। मरीज वहां आकर निराशा के साथ लौट रहे हैं। अस्पताल के सूत्रों का कहना था कि इतनी बड़ी योजना लागू करने से पहले दिल्ली के इन अस्पतालों में थोड़ा पहले ही तैयारियां शुरू कर लेनी चाहिए थीं।

छपने गई प्रचार सामग्री

इस बारे में जब सफदरजंग के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर राजेंद्र शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि प्रचार सामग्री छपने के लिए गई है, जल्द ही आ जाएगी। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर रहेजा को नोडल अफसर बनाया गया है। लाभार्थियों की पहचान के लिए सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर दिया गया है। यूपी, बिहार, हरियाणा या कहीं और से अगर कोई मरीज आता है, तो उसका डेटा लेकर सॉफ्टवेयर से मिलान किया जाएगा और योजना के सभी फायदे दिए जाएंगे। डॉक्टर शर्मा ने बताया कि यह योजना सरकारी अस्पतालों के लिए बेहद लाभकारी है। अभी तक इंप्लांट और स्टेंट का खर्च मरीजों को देना पड़ता था, लेकिन योजना के लागू होने बाद नहीं देना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इंप्लांट को लेकर अमृत फार्मेसी के साथ बैठक हो चुकी है।

2 अक्टूबर से शुरू होगी

आयुष्मान भारत के डिप्टी सीईओ डॉक्टर दिनेश अरोड़ा का कहना है कि अगले हफ्ते से इन अस्पतालों की तमाम दिक्कतें दूर हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि 2 अक्टूबर से पोर्टेबिलिटी के साथ इन सभी अस्पतालों में आयुष्मान भारत की योजना पूरी तरह से क्रियान्वित हो जाएंगी। चूकि दिल्ली सरकार ने अभी तक एमओयू साइन नहीं किया है, इसलिए दिल्ली को अभी तक इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

दिल्ली तैयार नहीं होगी तो हरियाणा से हों इम्पैनल

नेशनल हेल्थ एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक दिल्ली के अस्पतालों का इस योजना में इम्पैनल होना बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां लोग देश के कोने-कोने से इलाज के लिए आते हैं। दिल्ली सरकार चाहती है कि इस प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में से नाम हटा कर मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना कर दिया जाए, जिसके लिए नेशनल हेल्थ एजेंसी तैयार नहीं है। उन्होंने बताया कि दिल्ली के निजी अस्पतालों को इम्पैनल करने के लिए हम दो विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, या तो वे सीधे ही हमारे साथ इम्पैनल हो जाएं या फिर हरियाणा के जरिए शामिल हो जाएं।उन्होंने बताया कि योजना में शामिल होने के लिए अभी तक 24697 प्राइवेट अस्पतालों से आवेदन मिल चुके हैं।



 
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