अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब गेंद केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के पाले में है। केंद्र को राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन करना है तो मस्जिद के लिए जमीन का अधिग्रहण राज्य सरकार को करना है। मस्जिद के लिए अयोध्या में एकमुश्त पांच एकड़ जमीन या तो विवादित स्थल से पांच किलोमीटर दूर कुसमाहा गांव में मौजूद है या 10 किलोमीटर दूर भदरसा में।
बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाने वाले बाबर के सेनापति मीर बकी की मजार कुसमाहा गांव में ही बनी है। राज्य सरकार ने इस तरह की एक और जगह राम जन्मभूमि मंदिर के पीछे आरा मशीन के पास भी चिह्नित की है। मस्जिद निर्माण का काम सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही कराना है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने बाद ही केंद्र हरकत में आ गया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और गृह सचिव अजय भल्ला समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बैठक हुई। पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई और सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रस्तावित ट्रस्ट के स्वरूप पर भी बात हुई।
हालांकि संघ परिवार अभी ट्रस्ट में शामिल होने को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रहा है लेकिन केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है कि इसमें शंकराचार्य, श्री श्री रविशंकर और जग्गी वासुदेव जैसे जाने-माने धर्माचार्य, प्रतिष्ठित समाजसेवी और विभिन्न क्षेत्रों की सम्मानित हस्तियों को शामिल किया जाएगा।
सरकार द्वारा गठित किए जाने वाले ट्रस्ट का काम मंदिर निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित करना है। राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण पिछले 26 वर्षों से मंदिर के लिए पत्थर जुटा रहा राम जन्मभूमि न्यास ही कराएगा। राम जन्मभूमि न्यास के पास तीन मंजिला मंदिर के लिए जरूरी निर्माण सामग्री में से पहली मंजिल के पत्थर पहले से ही तराशे हुए रखे हैं।
विहिप के महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन के मुताबिक जैसे-जैसे निर्माण कार्य होगा, मंदिर के लिए बाकी निर्माण सामग्री भी तैयार हो जाएगी। जन्म भूमि न्यास की योजना अगले तीन वर्षों में मंदिर निर्माण पूरा कर लेने की है।