सिसोदिया ने रिपोर्ट पर ही सवाल उठाए
वहीं, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने ऐसी किसी रिपोर्ट के होने पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा उन्हें वह रिपोर्ट दिखाए जिसे सुप्रीम कोर्ट के पैनल के सदस्यों ने अपना हस्ताक्षर करके पेश किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ऐसी कोई रिपोर्ट अभी तक पेश नहीं की गई है। यह फर्जी रिपोर्ट भाजपा के मुख्यालय पर साजिश रचने के लिए तैयार की गई है और इसका उद्देश्य अरविंद केजरीवाल सरकार को बदनाम करना है।
दिल्ली सरकार भी है कमेटी में साझीदार
दरअसल, दिल्ली में जब अप्रैल-मई में कोरोना अपने चरम पर था, यहां ऑक्सीजन की कमी होने लगी। ऑक्सीजन पर राजनीति गरमाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया जिसे ऑक्सीजन की मांग और आपूर्ति पर एक ऑडिट रिपोर्ट देनी है। दिल्ली सरकार भी इस कमेटी की सदस्य है। डॉ. रणदीप गुलेरिया के अलावा इसमें डॉ. भुपिंदर भल्ला, डॉ. संदीप बुद्धिराजा, डॉ. सुबोध यादव और डॉक्टर संजय के सिंह इसके सदस्य हैं।
क्या है अंतरिम रिपोर्ट में
अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने अपने यहां ऑक्सीजन की मांग चार गुना बढ़ाकर बताई। जिस दिन उसे केवल 289 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी, उसने यह मांग 1140 मिट्रिक टन बताई। 3 मई 2021 को जब मुंबई और दिल्ली में लगभग एक समान मरीजों की संख्या थी, दिल्ली ने मुंबई की तुलना में चार गुना ज्यादा ऑक्सीजन मांगी। मुंबई ने 92 हजार मरीजों के लिए केवल 275 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की, वहीं दिल्ली में उसी दिन 95 हजार मरीज थे जिनके लिए दिल्ली ने 900 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की।
भाजपा का आरोप है कि दिल्ली सरकार के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग ऑक्सीजन की मांग कर रहे थे। सात मई को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की थी, जबकि उसी दिन पार्टी नेता राघव चड्ढा ने ऑक्सीजन की जरूरत 976 मीट्रिक टन बताई थी।
ऑक्सीजन की कमी के कारण दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में 24 अप्रैल 2021 को 25 लोगों की मौत हो गई थी। 1 मई 2021 को बत्रा अस्पताल में 12 मरीजों की मौत हो गई थी। इसके अलावा अन्य अनेक अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी से लोगों की जान जाती रही। बीमारों के परिजन ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए दर-दर भटकते रहे।