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पांच दशक से एटीएम का इस्तेमाल, जानें शुरुआत से अब तक क्या-क्या आए बदलाव

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Sun, 06 Sep 2020 01:37 PM IST
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एटीएम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock

आप पैसा निकालने के लिए एटीएम जैसी जिस आसान सी मशीन का इस्तेमाल करते हैं, क्या आप जानते हैं कि उसका आविष्कार कब हुआ था? एटीएम यानि कि ऑटोमैटेड टेलर मशीन को बैंकिंग सेक्टर का क्रांतिकारी बदलाव माना जाता है? सबसे पहली बार एटीएम का उपयोग लंदन में किया गया था।

हालांकि तथ्य तो यह भी कहते हैं कि आधुनिक एटीएम का इस्तेमाल सबसे पहले अमेरिका में साल 1969 में शुरू हुआ था। लेकिन साल 1967 में लंदन के बारक्लेज बैंक की एक शाखा में एटीएम लगाया जा चुका था। एटीएम की शुरुआत से लेकर अब तक मशीन में कई बदलाव किए जा चुके हैं, क्या हैं वो बदलाव आइए जानते हैं...

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एटीएम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
आप पैसा निकालने के लिए एटीएम जैसी जिस आसान सी मशीन का इस्तेमाल करते हैं, क्या आप जानते हैं कि उसका आविष्कार कब हुआ था? एटीएम यानि कि ऑटोमैटेड टेलर मशीन को बैंकिंग सेक्टर का क्रांतिकारी बदलाव माना जाता है? सबसे पहली बार एटीएम का उपयोग लंदन में किया गया था।

हालांकि तथ्य तो यह भी कहते हैं कि आधुनिक एटीएम का इस्तेमाल सबसे पहले अमेरिका में साल 1969 में शुरू हुआ था। लेकिन साल 1967 में लंदन के बारक्लेज बैंक की एक शाखा में एटीएम लगाया जा चुका था। एटीएम की शुरुआत से लेकर अब तक मशीन में कई बदलाव किए जा चुके हैं, क्या हैं वो बदलाव आइए जानते हैं...

शुरुआती दौर में ट्रांजैक्शन की प्रक्रिया

एटीएम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
लंदन के बारक्लेज बैंक की एटीएम को डि ला रू ऑटोमैटिक कैश सिस्टम या डाक्स कहा जाता था। इस एटीएम को जॉन शैफर्ड बैरन की टीम ने बनाया था। इसमें ट्रांजैक्शन के लिए कागज के चेक को अंदर डालना पड़ता था, ये कागज बैंक के कैशियर की ओर से दिया जाता था। 

इस कागज को कार्बन-14 से चिन्हित किया जाता था, ताकि मशीन इसे पढ़ सके। इसी चिह्न में कागज की सुरक्षा भी निहित होती थी, बाद में इस कागज को छह अंकों के एक पिन नंबर में बदल दिया। लंदन में शुरू किए गए एटीएम का इस्तेमाल कुछ इस तरह किया जाता था।

कार्ड को उपयोग में लाया गया

एटीएम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
लंदन में इस्तेमाल किए गए एटीएम के बाद एक मशीन स्पेटेक और मिडलैंड बैंक ने बनाई। इस मशीन में सिंगल यूज टोकन और वाउचर की जगह एक कार्ड का इस्तेमाल किया गया। इस कार्ड के पीछे एक मैग्नेटिक स्ट्रिप का इस्तेमाल किया जाता था। इस कार्ड में कार्बन-14 के साथ ही मैग्नेटिज्म को प्रयोग किया गया ताकि धोखाधड़ी को रोका जा सके।

खास कोड डालकर एटीएम से निकाले जाते थे पैसे

एटीएम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
साल 1965 से ही कार्ड में ही पिन रखे जाने पर विचार चल रहा था। इसके बाद 1970 के दशक में यह कार्ड काफी चला लेकिन दो सितंबर 1969 को आधुनिक कार्ड का सबसे पहली बार इस्तेमाल अमेरिका में किया गया। न्यूयॉर्क की मशीन को पहला आधुनिक एटीएम माना जाता है।

इस कार्ड की खासियत यह थी कि जब ग्राहक एक खास कोड के कार्ड को एटीएम मशीन में डालता था, तो उसमें से एक बार में एक निश्चित राशि ही निकलती थी। ऐसा कहा जाता है कि इस मशीन को विकसित करना आसान काम नहीं था, इसके लिए बहुत मेहनत और शोध किया गया था।

माइक्रोप्रोसेसर आधारित मशीन

एटीएम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
70 के दशक में माइक्रोप्रोसेसर आधारित मशीन बननी शुरू हुई, इसके बाद एक हार्डवेयर सिक्योरिटी मॉड्यूल बनाया गया। इस मॉड्यूल को आटाला बॉक्स के नाम से जाना गया। यह एक तरह से सुरक्षा व्यवस्था थी, इसमें कोड किए गए पिन और एटीएम संदेश को रखा जाता था। 

इस मशीन में ग्राहक एक कोड डालता था, जिसे मशीन एक दूसरे कोड में बदलती थी और जो टेलर के पास जाता था। इसी के साथ मशीन ग्राहक के अकाउंट नंबर को भी जान लेती थी, यही प्रक्रिया आधुनिक समय के एटीएम में काम करती है।

1979 में बैंकों के एटीएम का समन्वय

एटीएम (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : iStock
साल 1979 में एटीएम के आपस में तालमेल बैठाने को लेकर कोशिशें शुरू की गई थीं। साल 2012 में ही रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड ने एक ऐसी व्यवस्था दी, जिसमें ग्राहक बिना अपने कार्ड का इस्तेमाल किए छह अंकों को उपयोग कर पैसे निकाल सकता था।

1987 में भारत में एटीएम की शुरुआत
एचएसबीसी बैंक ने भारत में एटीएम की शुरुआत की थी, यह एक विदेशी बैंक है और इसी बैंक ने साल 1987 में पहली बार भारत में एटीएम लगाया थी। हालांकि मौजूदा समय में देश में दो लाख 38 हजार के करीब एटीएम हैं।
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