वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी में रिकॉर्ड गिरावट के बाद बाजार को अगले त्योहारों के सीजन से काफी उम्मीदें हैं। अनुमान है कि त्योहारों के दौरान बाजार में मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटेगी। लेकिन इसके लिए बाजार में नकदी की कमी पूरी होना बेहद जरूरी माना जा रहा है, जो नोटबंदी के बाद अब तक पूरी नहीं हो पाई है। बाजार में मांग पैदा करने के लिए भी नकदी की उपलब्धता को सबसे अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि बाजार में नकदी झोंकने के लिए सरकार को आधारभूत संरचनाओं में पैसा लगाना चाहिए।
कोरोना काल का असर कुछ कम हुआ है, लेकिन अभी भी इसका असर बरकरार है और बहुत संभव है कि अगले कुछ महीनों तक यह बना रहे। ऐसे में बाजार में नौकरियों की कमी बनी रहेगी और लोगों के पास पैसा बहुत कम पहुंचेगा। इसलिए बाजार में मांग बढ़ाने के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों के हाथों तक पैसा पहुंचाना है। इसके बिना मांग में बढ़ोतरी की संभावना नहीं बनेगी।
हेमंत सेठ का कहना है कि बाजार में नकदी की कमी को दूर करने के लिए सरकार को भारी मात्रा में ढांचागत योजनाओं पर खर्च बढ़ाना चाहिए। इससे अनेक सहयोगी क्षेत्रों की सेवाओं में भी बढ़ोतरी पैदा होगी और मांग-सप्लाई चेन मजबूत होगी। आर्थिक गतिविधियों में कमी के कारण इस वर्ष जीएसटी का कलेक्शन कम हुआ है और सरकार के पास संसाधनों की कमी है। ऐसे में उसके समक्ष भी चुनौती है, लेकिन अंततः यही वे उपाय हैं जिससे अर्थव्यवस्था को गति दी जा सकती है।
टेलीकॉम इक्विपमेंट मैनूफैक्चरिंग एसोसिएशन (TEMA) के शीर्ष पदाधिकारी एनके गोयल ने कहा कि कोरोना काल में टेलीकॉम गतिविधियां ठहर गई थीं, लेकिन लॉकडाउन के बाद ऑनलाइन बाजार में जिस तरह तेजी आई है, उससे उम्मीद है कि टेलीकॉम बाजार में भी तेजी आएगी।
त्योहारी सीजन में लोग मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, आईपैड और अन्य उपकरणों की खरीद करेंगे। उन्होंने कहा कि बाजार को उम्मीद है कि सरकार कुछ ऐसे कदम उठाएगी जिससे लोगों के हाथ में ज्यादा से ज्यादा पैसा जाएगा और बाजार में मांग पैदा होगी।