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वंदे भारत ट्रेन के निर्माण में ‘आत्मनिर्भर भारत’ होगा प्राथमिकता : रेलवे

Mon, 24 Aug 2020 02:37 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वंदे भारत एक्सप्रेस - फोटो : अमर उजाला
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चीन के साथ सीमा तनाव के बीच रद्द कर दी गई 44 वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण की निविदा जल्द ही दोबारा जारी होगी। इस बार निविदा के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आत्मनिर्भर भारत’ योजना को प्राथमिकता दी जाएगी।

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उन्हीं कंपनियों को निविदा में भाग लेने का मौका मिलेगा, जो भारत में ही ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इन ट्रेनों का निर्माण करेंगी। इन ट्रेनों के निर्माण में स्वदेशी उत्पादों का इस्तेमाल फिलहाल तय 50 फीसदी के बजाय ज्यादा से ज्यादा मात्रा में किया जाएगा।


इतना ही नहीं इन ट्रेनों के डिब्बे भी कोविड-19 (कोरोना वायरस) महामारी के प्रभाव को बचाने के लिहाज से डिजाइन किए जाएंगे। रेलवे का दावा है कि नए सिरे से मेक इन इंडिया के तहत निर्माण की गाइड लाइंस तैयार करने के बाद अगले एक सप्ताह में नई निविदा जारी कर दी जाएगी।
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रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने रविवार को बताया कि नई निविदा में वंदे भारत ट्रेन का निर्माण भारतीय रेलवे की तीनों उत्पादन इकाइयों में करने का प्रावधान रखा जाएगा। साथ ही इन ट्रेनों को बनाने की समयीसीमा भी घटाई जाएगी। 

इससे पहले रेलवे की इंटिग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई ने 10 जुलाई को 44 वंदे भारत ट्रेन बनाने के लिए निविदा निकाली थी। जब यह निविदा खोली गई तो 16 डिब्बे वाली इन 44 ट्रेनों के इलेक्ट्रिकल उपकरणों समेत अन्य सामान की आपूर्ति के लिए कुल छह कंपनियों ने दावेदारी पेश की थी। इनमें एक चीनी संयुक्त उद्यम कंपनी सीआरआरसी पायनियर इलेक्ट्रिक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल थी।

अन्य कंपनियों में सरकारी कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, द भारत इंडस्ट्रीज संगरूर, द इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, द मेधा सर्वो ड्राइवर्स प्राइवेट लिमिटेड और पॉवरनेटिक्स इक्विपमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल थे। बाद में इस पूरी निविदा प्रक्रिया को टेंडर कमेटी की सलाह पर रद्द कर दिया गया था।

तकनीकी गड़बड़ी के कारण रद्द की थी निविदा
रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने पिछली निविदा रद्द करने के पीछे चीन से सीमा तनाव को कारण मानने से इंकार कर दिया। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने निविदा रद्द करने के पीछे सिर्फ पारदर्शिता और तकनीकी गड़बड़ी होने को ही मुख्य वजह बताया।

उन्होंने कहा, निविदा को दो पैकेटों में मांगा गया था। पहले पैकेट में तकनीकी बोली थी और दूसरे पैकेट में वित्तीय बोली मांगी गई थी। यादव ने कहा, पहले तकनीकी बोली को खोलकर उसका आकलन किया जाना था। तकनीकी बोली में सफल होने वाली कंपनियों के ही दूसरे पैकेट खोलना तय किया गया था।

उन्होंने कहा, तकनीकी बोली का पैकेट खोलने पर कई कंपनियों ने उसमें अपनी वित्तीय बोली का ब्योरा भी भर दिया था। लेकिन टेंडर इवैल्यूएशन कमेटी ने लिफाफा खोलने पर इस गड़बड़ी को पकड़ लिया था। यादव ने कहा, इसी कारण तकनीकी आधार पर वह निविदा रद्द की गई थी।
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हालांकि उस समय चीन के साथ तनाव चरम सीमा पर होने के कारण चीनी कंपनियों को मौका नहीं देने के निर्णय को जिम्मेदार ठहराया गया था।

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