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विधानसभा चुनाव परिणाम 2019: सिक्किम में टूटा 25 साल का रिकॉर्ड, चामलिंग की पार्टी हारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Fri, 24 May 2019 12:19 PM IST
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पवन कुमार चामलिंग - फोटो : File Photo

सिक्किम में लंबे समय से ही क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा रहा है। इस बार भी यहां यही नजारा दिखा। लेकिन हैरानी की बात ये रही कि 25 साल से सत्ता में काबिज पवन कुमार चामलिंग की सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी (एसडीएफ) को हार नसीब हुई। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने जीत हासिल की है। 

चामलिंग की एसडीएफ पार्टी ने 32 में से 15 सीट हासिल की हैं। जबकि 2013 में अस्तित्व में आए एसकेएम ने 17 सीटें हासिल की हैं। बहुमत के लिए भी 17 सीटें ही चाहिए। यहां राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है। साल 1994 से एसडीएफ के नेता पवन कुमार चामलिंग राज्य के मुख्यमंत्री थे।





चामलिंग पांच बार मुख्यमंत्री रहे हैं। उनकी पार्टी की हार से राज्य में 25 साल का दौर खत्म हो गया है। लेकिन चामलिंग ने जिन दो सीटों पर चुनाव लड़ा वहां उन्होंने जीत हासिल की है। पवन कुमार चामलिंग ने विधानसभा की दोनों सीटों पर जीत हासिल कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चामलिंग ने नामची सिंह थांग और पकलोक विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा था।

उन्होंने नामची सिंह थांग सीट से 377 मतों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं पकलोल से उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के खड़क बहादुर राय को 2,899 वोट से परास्त कर दिया।

2014 में क्या थी स्थिति?

2014 में हुए विधानसभा चुनावों में एसडीएफ को 22 सीटें मिली थीं। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) को 10 सीटें मिली थीं। इससे पहले 2009 में हुए चुनावों में चामलिंग की पार्टी को पूरी 32 सीटें मिली थीं। वहीं राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति यहां बिल्कुल मजबूत नहीं है। 

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पवन कुमार चामलिंग - फोटो : File Photo
सिक्किम में लंबे समय से ही क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा रहा है। इस बार भी यहां यही नजारा दिखा। लेकिन हैरानी की बात ये रही कि 25 साल से सत्ता में काबिज पवन कुमार चामलिंग की सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी (एसडीएफ) को हार नसीब हुई। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने जीत हासिल की है। 

चामलिंग की एसडीएफ पार्टी ने 32 में से 15 सीट हासिल की हैं। जबकि 2013 में अस्तित्व में आए एसकेएम ने 17 सीटें हासिल की हैं। बहुमत के लिए भी 17 सीटें ही चाहिए। यहां राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है। साल 1994 से एसडीएफ के नेता पवन कुमार चामलिंग राज्य के मुख्यमंत्री थे।



चामलिंग पांच बार मुख्यमंत्री रहे हैं। उनकी पार्टी की हार से राज्य में 25 साल का दौर खत्म हो गया है। लेकिन चामलिंग ने जिन दो सीटों पर चुनाव लड़ा वहां उन्होंने जीत हासिल की है। पवन कुमार चामलिंग ने विधानसभा की दोनों सीटों पर जीत हासिल कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चामलिंग ने नामची सिंह थांग और पकलोक विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा था।

उन्होंने नामची सिंह थांग सीट से 377 मतों के अंतर से जीत हासिल की। वहीं पकलोल से उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के खड़क बहादुर राय को 2,899 वोट से परास्त कर दिया।

2014 में क्या थी स्थिति?

2014 में हुए विधानसभा चुनावों में एसडीएफ को 22 सीटें मिली थीं। वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) को 10 सीटें मिली थीं। इससे पहले 2009 में हुए चुनावों में चामलिंग की पार्टी को पूरी 32 सीटें मिली थीं। वहीं राष्ट्रीय पार्टियों की स्थिति यहां बिल्कुल मजबूत नहीं है। 

पवन कुमार चामलिंग - फोटो : File Photo

कौन हैं मुख्य पार्टिंयां?

एसडीएफ और एसकेएम के अलावा मुख्य पार्टियों में सिक्किम संग्राम परिषद (एसएसपी), सिक्किम नेशनल पीपुल्स पार्टी (एसएनपीपी) और हमारो सिक्किम पार्टी थीं। बता दें इसी साल पूर्व फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया ने इस पार्टी का निर्माण किया है। ये पार्टी अकेले चुनाव मैदान में उतरी। चामलिंग ने चुनाव नतीजों के बाद फेसबुक पर लोगों को 25 साल तक साथ देने के लिए धन्यवाद कहा है।


 

आखिर क्यों राष्ट्रीय पार्टियों को यहां मौका नहीं मिलता?

एसएनपीपी पार्टी के अध्यक्ष डी बारफुंगपा का कहना है कि वह राष्ट्रीय दलों पर अनुच्छेद 371 (एफ) के संरक्षण को लेकर भरोसा नहीं कर सकते हैं। यह सिक्किम के लोगों को मिले विशेष अधिकारों की रक्षा करता है। ठीक ऐसा ही सत्तारूढ़ एसडीएफ के प्रवक्ता के.टी. ग्यालत्सेन का भी कहना है। 
 

2016 में सबसे अमीर राज्य

अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के मुकाबले सिक्किम की स्थिति अधिक बेहतर मानी जाती है। साल 2016 में ये भारत का तीसरा सबसे अमीर राज्य था। 2016 में सिक्किम देश का पहला और अकेला ऑर्गेनिक स्टेट भी बना। वहीं महिलाओं के काम करने की स्थिति को लेकर एक सर्वे किया गया था। इसमें भी सिक्किम की स्थिति काफी बेहतर रही।

कहां कमजोर हुई एसडीएफ?

लंबे समय से सत्ता में काबिज एसडीएफ जिन मुद्दों पर कमजोर रही, उनमें से एक है आत्महत्या। 2015 में सिक्किम में सुसाइड रेट (10 हजार लोगों पर) 37.5 फीसदी था। यह न केवल भारत के 10.6 फीसदी औसत से तीन गुना अधिक है बल्कि दुनिया के 11.4 फीसदी औसत से भी ज्यादा है। बेरोजगारी दर के मामले में भी सिक्किम काफी आगे है। हालांकि यहां शिक्षा व्यवस्था अच्छी है लेकिन रोजगार की कमी के चलते इसका कोई प्रभाव नहीं रह जाता है। 
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