लगातार बारिश की वजह से लखीमपुर, नगांव, होजाई, जिलों में कई सड़कें, पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं, डिमा हसाउ जिले में बाढ़ से रेलवे लाइन बह गई। कई स्टेशनों पर पटरियां जलमग्न हो गई हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन से पटरियों के नीचे की जमीन धंस गई और पटरियां हवा में झूलने लगीं।
बीते कुछ दिनों से लगातार बारिश की वजह से असम में नदियों के उफान पर होने से जहां कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं, वहीं भूस्खलन की घटनाओं ने भी परेशानी बढ़ा दी है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के मुताबिक अकेले कछार जिले में 51,357 लोग प्रभावित हुए हैं। 652 गांवों में 16,645.61 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है। प्रशासन के अनुसार कछार में दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो बच्चे समेत तीन लापता बताए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने 55 राहत शिविर और 12 वितरण केंद्र स्थापित किए हैं जिनमें 32,959 बाढ़ प्रभावितों ने शरण ली है।
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वहीं, कछार जिले में हालात काफी खराब हैं। अचानक आई बाढ़ के कारण यहां 41,000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएम) के मुताबिक जिले के 138 गांवों के 41,037 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि 1,685 लोगों ने राहत शिविरों में शरण लिया है। इस बीच, नगांव जिले में कोपिली नदी का जल स्तर बढ़ने से कई अन्य इलाके भी जलमग्न हो गए हैं।
119 यात्रियों को किया एयर लिफ्ट
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि लामडिंग डिवीजन के लामडिंग-बदरपुर पहाड़ी खंड में कई स्थानों पर लगातार बारिश, भूस्खलन और जलभराव के चलते ट्रेन सेवाओं में बदलाव किया गया। एनएफ रेलवे के सीपीआरओ सब्यसाची डे ने बताया कि एयर लिफ्ट करने के अलावा डिटोकचेरा से दो ग्रुप में 1,245 और 250 यात्रियों को ट्रेन के जरिये निकाला गया है। इसके अलावा 373 यात्रियों को न्यू हाफलांग से निकाला गया है। वहीं, बचे 345 यात्रियों को सोमवार को निकाला गया।
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डिमा हसाउ में बाढ़ के कारण रेल पटरियां बहीं
लगातार बारिश की वजह से लखीमपुर, नगांव, होजाई, जिलों में कई सड़कें, पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं, डिमा हसाउ जिले में बाढ़ से रेलवे लाइन बह गई। कई स्टेशनों पर पटरियां जलमग्न हो गई हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन से पटरियों के नीचे की जमीन धंस गई और पटरियां हवा में झूलने लगीं।