छात्र राजनीति के समय से कांग्रेस में रहने वाले असम की राहा सीट से विधायक शशिकांत दास को भाजपा सरकार का विकास रास आ गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा से सोमवार को मिलकर उन्होंने सरकार को समर्थन की घोषणा कर दी। हालांकि यह भी साफ कर दिया कि कांग्रेस से इस्तीफा नहीं देंगे। कांग्रेस उनके इस फैसले से हैरत में है।
विधानसभा के शीतसत्र के पहले ही दिन दास ने सदन में मुख्यमंत्री के चेंबर में असम भाजपा अध्यक्ष भावेश कलिता की उपस्थिति में सरकार को अपना समर्थन दिया। सीएम व प्रदेश अध्यक्ष ने उनका स्वागत किया और स्मृति चिह्न प्रदान किया। कांग्रेस ने इसे चौंकाने वाली घटना करार दिया। दास ने कहा कि वह हिमंत बिस्व सरमा के कामकाज से प्रभावित हैं और अपने क्षेत्र की जनता के विकास के लिए वह सरकार का समर्थन कर रहे हैं।
सीएम सरमा ने कहा, दास हमारी सरकार के काम से प्रभावित हैं। अपनी विधानसभा सीट राहा के विकास के लिए हमारा समर्थन कर रहे हैं। वह सरकार के साथ हैं, हमारी बैठकों में भी शामिल होंगे लेकिन विधानसभा में विपक्ष के खेमे में ही बैठेंगे। अभी यह तय नहीं हुआ है कि वह कांग्रेस से इस्तीफा देंगे या नहीं। बता दें कि हिमंत बिस्व सरमा भी पहले कांग्रेस में थे और तरुण गोगोई की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने 2015 में भाजपा की सदस्यता ली थी।
अभी कांग्रेस में हूं : दास
दास ने कहा, मैं विकास के मुद्दे पर सरकार के साथ हूं। कांग्रेस से इस्तीफे के सवाल पर दास ने कहा, अभी इसकी नौबत नहीं आई है। मैं कांग्रेस में ही हूं लेकिन विकास का समर्थन करूंगा। अगर कोई तार्किक मामला होगा तो उसमें कांग्रेस का साथ दूंगा।
विधानसभा का गणित
असम विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के पास 126 सदस्यीय सदन में 62 विधायक हैं। उसके सहयोगी दल यूपीपीएल के सात और एजीपी के नौ विधायक हैं। वहीं विपक्षी खेमे में कांग्रेस के 27, एआईयूडीएफ के 15, बीपीएफ के तीन और माकपा का एक विधायक है।
ऐसा कैसे मुमकिन: कांग्रेस
विधानसभा में कांग्रेस दल के नेता देवब्रत सैकिया ने दास के इस कदम को चौंकाने वाला बताते हुए कहा, ऐसा कैसे मुमकिन है। भाजपा से शॉल ले लेने या स्मृति चिह्नों की अदला-बदली से दास सरकार में कैसे जा सकते हैं? भाजपा का खुला समर्थन करने के बाद वह कांग्रेस के सदस्य कैसे रह सकते हैं?
कांग्रेस अब क्या कर सकती है
दास के फैसले के बाद कांग्रेस उनके खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत कर दल-बदल का आरोप लगा उन्हें अयोग्य घोषित करने की मांग कर सकती है। स्पीकर इस शिकायत को पूरे सत्र तक लंबित रख सकता है। कांग्रेस इसके खिलाफ हाईकोर्ट भी जा सकती है। इसके अलावा पार्टी दास को निकाल सकती है लेकिन तब उनकी सदस्यता बरकरार रहेगी।