असम विधानसभा ने गुरुवार को राज्य में नगर निकायों के निर्वाचन क्षेत्रों में बारी-बारी से महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटें 10 साल के लिए आरक्षित करने के लिए दो विधेयक पारित किए।
असम नगरपालिका (तीसरा संशोधन) विधेयक, 2021 का प्रस्ताव है कि किसी भी नगर पालिका में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों सहित प्रत्यक्ष चुनाव से भरी जाने वाली सीटों की कुल संख्या का 50 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। असम म्यूनिसिपल एक्ट, 1956 में संशोधन के अनुसार, आरक्षित सीटें हर 10 साल में एक नगर पालिका में अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन द्वारा आवंटित की जाएंगी।
शहरी विकास मंत्री अशोक सिंघल ने कहा, "एक वार्ड में 10 साल के लिए आरक्षण प्रदान करने का कदम महिलाओं को चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करेगा और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा लागू की गई योजनाओं में स्थिरता लाने में सक्षम होगा।"
विधानसभा ने गुवाहाटी नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2021 को भी पारित किया। इस विधेयक के अनुसार, पार्षदों के सीधे चुनाव में महिला आरक्षण के कार्यकाल को 10 साल तक बढ़ाया गया है।
गुवाहाटी नगर निगम (जीएमसी) अधिनियम, 1969 में संशोधन के तहत नियमों का उल्लंघन किए जाने पर कठोर दंड लगाने का भी प्रावधान किया गया है, क्योंकि दंड के अधिकांश प्रावधान अब उल्लंघनकर्ताओं के लिए निवारक के रूप में काम नहीं करेंगे। आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित तथ्यों के अनुसार, यह अधिनियम सरकार को आवश्यकता पड़ने पर जीएमसी के वार्डों की संख्या बढ़ाने का अधिकार भी देता है।
सिंघल द्वारा पेश किए गए एक अन्य संशोधन विधेयक में यह प्रस्तावित किया गया है कि राज्य सरकार गुवाहाटी महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के मुख्य अभियंता को अपने अधीन किसी भी विभाग के अधीक्षण अभियंता (सिविल) के पद से नीचे नहीं नियुक्त कर सकती है। इससे पहले, केवल राज्य पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता के पद से नीचे के अधिकारी ही जीएमडीए के मुख्य अभियंता के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं थे।
विधानसभा ने सदन के शीतकालीन सत्र के दौरान असम उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2021 और तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी विधेयक, 2021 भी पारित किया गया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि 'असम विधानसभा में गुरुवार को पारित हुए तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी विधेयक, 2021 में समान पद, भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाकर सरकारी खजाने के बोझ को बहुत कम करेंगे और हमें देश के बेरोजगार युवाओं को एक लाख नौकरियां प्रदान करने के अपने वादे को पूरा करने के करीब ले जाएंगे।