चिलचिलाती धूप में 50 दिन की मेहनत
वे बताते हैं कि करीब 50 दिन हमने संसद की छत पर बिताए। 45-50 डिग्री से ज्यादा तापमान में हमने किया, कई साथी बीमार भी हुए, लेकिन जुनून और जज्बा अलग था। हमारी यही सोच थी कि हम देश के लिए यह काम कर रहे हैं और ईश्वर की दया से प्रतिकृति स्थापित हो गई। इसे इटैलिन लॉस्ट वैक्स प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया। इसमें 150 टुकड़े थे। इसे संसद भवन की इमारत पर जाकर ही जोड़ा गया और वेल्डिंग की गई।
उन्होंने बताया कि हमारे लिए हर कृति एक चुनौती होती है। हमारा ध्येय रहता है कि हम पूरी कला को उसमें समाहित करें। जब यह प्रतिकृति भारत की सबसे बड़ी पंचायत में लगने वाली थी तो हमारी जिम्मेदारी बढ़ गई। इस प्रक्रिया में कई डिजाइनर, कई अधिकारी शामिल रहे, तब जाकर यह प्रतिकृति वहां स्थापित हो पाई।