किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हजारों लोगों को डायलिसिस मशीन के जरिए जिंदा रखा जाता है। इसके लिए उन्हें घंटों अस्पताल के बेड पर रहना पड़ता है, लेकिन अब ऐसे मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। दरअसल मुट्टी भर आकार की आर्टिफिशियल किडनी डिवाइस के इस दशक के आखिर तक मार्केट में आ जाने की उम्मीद है।
टैंकर वार्षिक चैरिटी और अवॉर्ड्स कार्यक्रम की रात बुधवार को इस डिवाइस के सह-निर्माता डॉक्टर शुवो रॉय ने कहा, 'अमेरिका में इस डिवाइस पर काम हो रहा है और सैकड़ों मरीजों पर इसकी सुरक्षा और काम करने की क्षमता का परीक्षण चल रहा है। इसके बाद एफडीए (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) की ओर से इसे स्वीकृति मिल जाएगी। डॉ. शुवो यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैनफ्रांसिस्को में रिसर्चर हैं।
इस डिवाइस को मरीज के पेट में लगाया जा सकता है और यह हृदय की सहायता से चलेगी। इसका काम मुख्य तौर पर खून को फिल्टर करना और किडनी के दूसरे कामों को अंजाम देना है। जैसे, हार्मोन्स का उत्पादन और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में मदद करना। यह डिवाइस डायलिसिस की तरह खून से केवल टॉक्सिन्स को अलग नहीं करती बल्कि इसके पास एक मेम्ब्रेन भी है जो ब्लड को फिल्टर करता है और बायो-रिएक्टर किडनी की कोशिकाओं में भी रक्त प्रवाहित करता है।
उन्होंने कहा, 'यह डिवाइस कन्वेंशनल डायलिसिस के मुकाबले किडनी के काम को बेहतरीन तरीके से करती है।'