समाचार पत्र निकालने में मुश्किल
शीर्ष अदालत में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने को लेकर दायर याचिका में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत को बताया कि मीडियाकर्मियों को उनके काम के लिए लैंडलाइन और कई अन्य संचार सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। कश्मीर स्थित सभी समाचार पत्र चल रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। प्रतिबंधित इलाकों में पहुंच के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं और पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गई है। दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं। याचिका में कहा गया था कि कश्मीर से समाचार पत्र निकालने में मुश्किल हो रही है। जिसका सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल ने जवाब दिया।
लोगों को नहीं मिल रही चिकित्सा सुविधा
उच्चतम न्यायालय में कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने दायर याचिका में दावा किया कि लोगों को चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। जिसके जवाब में अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि पूरे जम्मू और कश्मीर के 5.5 से ज्यादा लोग इलाज के लिए ओपीडी जा चुके हैं। उन्होंने भसीन के दावे को सिरे से खारिज किया। अदालत ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर से कहा कि वह घाटी में सामान्य जीवन सुनिश्चित करें और ऐसा करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षा को भी ध्यान में रखें।
तारिगामी की हिरासत का नहीं दिया कोई आदेश
उच्चतम न्यायालय ने माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी को अपने गृह राज्य जम्मू-कश्मीर वापस जाने की सोमवार को अनुमति दे दी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे एवं एसए नजीर की पीठ ने कहा कि यदि एम्स के चिकित्सक उन्हें अनुमति दें तो पूर्व विधायक को घर जाने के लिए किसी की अनुमति आवश्यक नहीं है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि उनका वाहन उनसे ले लिया गया है और वह अपने घर तक सीमित रहेंगे। बीमार नेता को न्यायालय के आदेश के बाद नौ सितंबर को एम्स में भर्ती कराया गया था।