आईएसआईएस आतंकवादी समूह में कथित रूप से शामिल होने जा रहे एक छात्र को हाल ही में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अब छात्र के माता-पिता उससे मिलने के लिए गुवाहाटी पहुंचे हैं। बता दें, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (आईआईटी-गुवाहाटी) के बायोसाइंस विभाग के बीटेक चतुर्थ वर्ष के छात्र तौसीफ अली फारुकी को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने शनिवार को बताया कि फारुकी के माता-पिता शुक्रवार को यहां पहुंचे। उसके बाद वह पुलिस थाने गए, जहां छात्र रविवार से 10 दिनों की पुलिस हिरासत में है। अधिकारी ने यह पुष्टि नहीं की कि वे अभी तक अपने बेटे से मिले हैं या नहीं।
आरोपी को 23 मार्च को कामरूप जिले के हाजो में हिरासत में लिया गया था। अगले दिन भारतीय दंड संहिता और यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में मिले कई विश्वसनीय सबूत
गौरतलब है कि आरोपी तौसीफ अली फारूकी को 23 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। असम पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के महानिरीक्षक पार्थसारथी महंत ने पहले कहा था कि फारुकी से पूछताछ के बाद पुलिस को आईएसआईएस के साथ उसके संबंधों के विश्वसनीय सबूत मिले और फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी छात्र कोर्ट में पेश, 10 दिन की पुलिस हिरासत
मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारी पार्थसारथी महंत ने कहा कि हमने आरोपी छात्र को अदालत में पेश किया, जिसने 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। हमने आईआईटी-गुवाहाटी परिसर के अंदर उसके छात्रावास के कमरे में भी तलाशी ली। उन्होंने बताया कि दिल्ली के रहने वाले फारूकी को भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की कई धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था।
आईएसआईएस में शामिल होने जा रहा था आरोपी छात्र
23 मार्च को कामरूप जिले के हाजो में पुलिस ने छात्र को उस वक्त गिरफ्त में लिया था, जब वह आतंकी समूह के प्रति अपनी वफादारी दिखाते हुए आईएसआईएस में शामिल होने जा रहा था।
पुलिस लगातार मामले में कर रही छानबीन
गौरतलब है कि छात्र को आईएसआईएस इंडिया के प्रमुख हारिस फारूकी उर्फ हरीश अजमल फारुखी और उसके सहयोगी अनुराग सिंह उर्फ रेहान को बांग्लादेश से पार करने के बाद धुबरी जिले में गिरफ्तार किए जाने के तीन दिन बाद आरोपी छात्र तौसीफ को पकड़ा।
कमरे से मिला काला झंडा
एसटीएफ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कल्याण कुमार पाठक ने बताया था कि छात्र ने एक ईमेल भेजा था, जिसमें उसने दावा किया था कि वह आईएसआईएस में शामिल होने जा रहा है। छात्रावास में उसके कमरे में एक काला झंडा पाया गया था जो कथित तौर पर आईएसआईएस के झंडे से मिलता-जुलता था। इसे उन विशेष एजेंसियों के पास सत्यापन के लिए भेजा गया है जो प्रतिबंधित संगठनों से निपटती हैं।