सेना देश में स्थित 2,000 छावनियों को आधुनिक बनाएगी। वह इन छावनियों को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित करने की योजना को अंतिम रूप देने में जुटी है। सेना के अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी पहल को अमली जामा पहनाने के लिए 58 छावनियों की पहचान पायलट प्रोजेक्ट के लिए कर ली गई है। सभी छावनियां इस परियोजना का हिस्सा होंगी।
सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, ‘हम सैन्य छावनियों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना चाहते हैं, जहां सभी आधुनिक सुविधाएं होंगी। नई तकनीक से लैस आईटी नेटवर्क इसकी मुख्य विशेषता होगी।’ हाल में हुई कमांडर कांफ्रेंस के दौरान, वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए विस्तार से चर्चा की थी।
उन्होंने कहा, सभी सैन्य छावनियों को एक समयसीमा के भीतर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। यह पहल सेना के उस आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है, जिसमें देशभर के सभी सैन्य प्रतिष्ठानों के आधारभूत ढांचे को बेहतर करने की परिकल्पना की गई है।
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एक अन्य अधिकारी के अनुसार, सेना लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीबी शेकतकर समिति की सिफारिशों पर भी आगे बढ़ रही है। इसमें सेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए 57,000 अधिकारियों और अन्य रैंक के सैनिकों की नए सिरे से तैनाती किया जाना शामिल है।
इस समिति ने सिग्नल प्रतिष्ठानों के अधिकतम इस्तेमाल, सैन्य फार्मों व शांति वाले स्थानों में सेना के पोस्टल संस्थानों को बंद करने और सेना के मरम्मत विभाग का पुनर्गठन करने का सुझाव दिया है।
अधिकारी ने बताया कि इन सिफारिशों को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। शेकतकर समिति द्वारा की गई 65 सिफारिशों को 31 दिसंबर, 2019 तक लागू कर दिया जाएगा।