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भारतीय सेना प्रमुख का पाकिस्तान को दो टूक जवाब, आतंक और शांतिवार्ता साथ-साथ संभव नहीं

Sun, 23 Sep 2018 05:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर भारतीय सेना प्रमुख जनरल ने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद और शांतिवार्ता एक साथ नहीं हो सकती। बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था कि वह दोनों देशों के संबंध बेहतर बनाना चाहते हैं। उन्होंने दोनों देशों के विदेश मंत्रियों को मुलाकात करने के लिए भी कहा था।भारत सरकार ने इसे मानते हुए न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके पाक समकक्ष शाम महमूद कुरैशी के बीच बैठक को लेकर अनुमति दी थी। लेकिन इसके बाद जम्मू कश्मीर में तीन पुलिसकर्मियों की हत्या और पाकिस्तान द्वारा कश्मीरी आतंकवादी बुरहान वानी का महिमामंडन करने वाली डाक टिकटों को जारी करने का हवाला देते हुए भारत सरकार ने इस बैठक को रद्द कर दिया था। इससे बौखलाए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारत सरकार पर कई सवाल उठाए थे। 

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आज भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि दोनों देशों के मध्य वार्ता इसलिए नहीं हो रही है क्योंकि हमारी सरकार की यह नीति है कि आतंकवाद के साथ शांति की बातें नहीं की जा सकतीं। हमने इसे लेकर पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दे दिया है। सरकार की नीति साफ है कि पहले पाकिस्तान को यह सिद्ध करना होगा कि वह आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं। 

भारत सरकार का फैसला सही

रावत ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा यह कहता है कि वह अपनी जमीन पर किसी भी देश के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को प्रोत्साहन नहीं देता है। लेकिन, साफ दिख रहा है कि वहां आतंकी गतिविधियां भी हो रही हैं और बॉर्डर पार से आतंकी भी आ रहे हैं। 

सरकार द्वारा वार्ता रद्द किए जाने के सवाल पर रावत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में बातचीत करना या न करना सरकार का निर्णय है। उन्होंने कहा कि मुझे सरकार का यह निर्णय सही लगा क्योंकि आंतकवाद के साथ शांतिवार्ता का कोई परिणाम नहीं निकलेगा। 


 

अमानवीय कृत्य करने की आदी है पाकिस्तानी सेना

जम्मू में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के पास पाक सैनिकों द्वारा बीएसएफ सैनिक नरेंद्र सिंह का गला काटने की घटना को लेकर उन्होंने कहा कि वह (पाकिस्तानी सेना) मानवीय कृत्यों को अंजाम देते रहे हैं और पाकिस्तानी सेना इसकी आदी हो गई है। इस सवाल पर कि क्या भारतीय सेना दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक करने की तैयारी कर रही है, उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक सेना का खास और गुप्त हथियार है, इसे गुप्त ही रहने दें। 

रावत ने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि इस तरह की घटनाएं कश्मीर में होती रहें। वो चाहते हैं कि क्षेत्र में शांति कायम न होने पाए। वो कश्मीर के युवा को कट्टरपंथी बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने भारत का खून बहाने का निर्णय कर लिया है। 


 
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कथनी और करनी में है अंतर

सेना प्रमुख ने कहा कि जब इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पद संभाला, उन्होंने शांति का संदेश देने की कोशिश की। लेकिन हमें यह समझना होगा कि क्या पूरा पाकिस्तान शांति चाहता है। उन्होंने कहा कि जो कहा जा रहा है और जो जमीन पर दिख रहा है, दोनों बातों में अंतर है। 

भविष्य में होने वाले युद्धों को लेकर रावत ने कहा कि भविष्य में युद्ध में हर तरह की तकनीक का प्रयोग होगा। इसलिए हमें खुद को पुनर्गठित करते हुए यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रौद्योगिकी, हथियार और उन हथियारों का प्रयोग करने वाले सैनिकों में समन्वयता हो। तकनीक का प्रयोग आवश्यक है। आपको संस्थान में कुछ परिवर्तन करने होते हैं और यह सुनिश्चित करना होता है कि आपके आदमी तकनीक के महत्व को समझते हैं। तभी आप आगे बढ़ सकते हैं। 
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