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सेना प्रमुख: 'जमीनी स्थिति ही सैन्य अभियान की सफलता का पैमाना'; सोशल मीडिया दुष्प्रचार पर क्या बोले धीरज सेठ?

Sun, 27 Sep 2026 05:36 PM IST
शिवम गर्ग एएनआई, नई दिल्ली

सार

सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक युद्ध की लड़ाइयों को छोटा कर सकती है, लेकिन युद्ध की अवधि नहीं। उन्होंने कहा कि सैन्य जीत का ठोस पैमाना आज भी जमीन और क्षेत्रीय नियंत्रण है।
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सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ। - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को रक्षा उत्पादन में इतना सक्षम होना चाहिए कि जरूरी क्षमताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने आत्मनिर्भरता का मतलब बताते हुए कहा कि भारत में डिजाइन, विकास, निर्माण, रखरखाव और अपग्रेड की पूरी क्षमता विकसित होनी चाहिए। साथ ही देश को दुनिया के लिए रक्षा उपकरण बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।

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सोशल मीडिया के 'साल्वो' पर क्या बोले?
आधुनिक युद्ध में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों की भूमिका का जिक्र करते हुए जनरल सेठ ने कहा कि दुनियाभर के संघर्षों से जुड़ी सूचनाएं लगातार सोशल मीडिया पर सामने आती हैं। उनके मुताबिक, इन सूचनाओं और अलग-अलग नैरेटिव के बीच वास्तविक युद्ध की तस्वीर धुंधली हो सकती है और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

'जीत आज भी जमीन से तय होती है'
सेना प्रमुख ने कहा कि तकनीक और आधुनिक क्षमताओं के बावजूद एक चीज नहीं बदली है। उनके अनुसार, युद्ध में सफलता का ठोस और उपयोगी पैमाना जमीन ही है। उन्होंने कहा कि जीत को क्षेत्रीय नियंत्रण के आधार पर मापा जाता है और जमीन पर कब्जा, सुरक्षा और रक्षा सैनिक ही करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य तकनीक विकसित करते समय सबसे अहम सवाल यह होना चाहिए कि नई क्षमता जमीन पर मौजूद सैनिक की कितनी मदद करती है। उनके मुताबिक, सैनिक को क्षमता विकास के केंद्र में रखा जाना चाहिए।
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तकनीक लड़ाई छोटी कर सकती है, युद्ध नहीं
जनरल धीरज सेठ ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज के संघर्षों में लंबे समय तक चलने वाले युद्ध और बीच-बीच में तेज लड़ाई के दौर देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक लड़ाई की अवधि कम कर सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि इससे पूरा युद्ध भी जल्दी खत्म हो। उनके मुताबिक, संघर्षों के बीच आने वाले विराम अब सैन्य रणनीति का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

देश में बनी तकनीक पुरानी न हो जाए
सेना प्रमुख ने घरेलू रक्षा उत्पाद विकसित करने वालों के सामने एक और चुनौती रखी। उन्होंने कहा कि सिर्फ दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना पर्याप्त नहीं है। यह भी जरूरी है कि भारत में विकसित की जा रही तकनीक इस्तेमाल में आने तक पुरानी न पड़ जाए। उन्होंने इस स्थिति को 'इंडिजिनस ऑब्सोलेसेंस' यानी स्वदेशी तकनीक के समय से पहले अप्रचलित हो जाने के खतरे के रूप में बताया।

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