पिछले सप्ताह एनआईए की टीम वाजे को लेकर इसी जगह फिर से आई थी और उस सीन को रीक्रिएट भी किया था। यानी अपराध जिस तरह हुआ था, उसे दोहराया गया। इसके पीछे एनआईए का मकसद था कि मामले की जांच में कोई कमी ना रहे। इस दौरान वाजे को सफेद कुर्ता-पजामा पहनाकर एक डमी स्कॉर्पियो तक चलाया गया था।
50 हजार रुपये देकर शिंदे से लिया लॉजिस्टिक सपोर्ट
एनआईए की जांच में पता चला कि इस मामले में लॉजिस्टिक हेल्प के लिए वाजे ने विनायक शिंदे को 50 हजार रुपये दिए थे। सूत्रों के अनुसार, शिंदे के जरिये वाजे एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आया, जो दक्षिण मुंबई में एक क्लब चलाता है। इस क्लब में जुआरी और सटोरियों की भीड़ जमा होती थी। यहीं उसकी मुलाकात इस मामले में गिरफ्तार बुकी नरेश गोरे से हुई थी।