पूर्वोत्तर में हिन्दी को लेकर किस तरह की स्थिति रही है?
पूर्वोत्तर के राज्यों में भी हिन्दी का इस्तेमाल बहुत कम होता है। इन राज्यों में केवल अरुणाचल प्रदेश ऐसा है जहां 10वीं तक की पढ़ाई में हिन्दी अनिवार्य भाषा है। बाकी राज्यों में केवल आठवीं तक हिन्दी पढ़ाई जाती है। वहीं, त्रिपुरा में तो ये अनिवार्य भी नहीं है। बीते आठ अप्रैल को ही गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्यों में 10वीं तक हिन्दी को अनिवार्य बनाया जाएगा। इसके लिए 2,200 हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति इन राज्यों में की जाएगी। केंद्र के इस कदम का असम के कुछ संगठनों ने विरोध भी किया है।
देश के कितने राज्यों में बोली जाती है हिन्दी?
2011 की जनगणना के मुताबिक देश के 35 में से 12 राज्यों (तब आंध्र और तेलंगाना अलग नहीं हुए थे।) में हिन्दी राज्य की पहली भाषा है। इनमें से ज्यादातर उत्तर और मध्य भारत के राज्य हैं। दक्षिण, पूर्वोत्तर, गुजरात, बंगाल जैसे राज्यों में हिन्दी बहुत कम बोली जाने वाली भाषा है। इनमें से कुछ राज्यों में दूसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी का इस्तेमाल होता है। हालांकि, किसी भी राज्य में हिन्दी के विरोध में तमिलनाडु जैसे उग्र प्रदर्शन नहीं हुए, इसके बाद भी महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा जैसे राज्य भाषाई बहुलता की वकालत करते रहे हैं।