कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बाल श्रम को समाप्त करने के लिए सरकार, समाज, निजी क्षेत्र और सिविल सोसायटी को एकजुट होकर साझा प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने मंत्रालयों, सिविल सोसायटियों, कारपोरेट और गैर सरकारी संस्थानों को 'टीम इंडिया अगेंस्ट चाइल्ड लेबर' का सदस्य बताते हुए कहा कि करोड़ों बच्चों को पीछे छोड़कर हम देश के विकास के बारे में कैसे सोच सकते हैं? यह स्वीकार करने योग्य नहीं है। यह मानवता के खिलाफ होगा। कोविड-19 महामारी ने हमारे बच्चों को सबसे अधिक असुरक्षित किया है। उन्होंने कहा कि वह सरकार से स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा देने और बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा की जरूरतों के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन करने का अनुरोध करते हैं। बाल मजदूरी कोई एकांगी समस्या नहीं है। इसका संबंध अशिक्षा और गरीबी से है। अगर बाल श्रम का खात्मा कर दिया जाए तो अशिक्षा और गरीबी अपने आप कम हो जाएगी।
इस राष्ट्रीय परिसंवाद की प्रासंगिकता तब और बढ गई है जब आईएलओ और यूनिसेफ ने मिलकर दुनियाभर में बाल श्रमिकों की स्थिति पर 'चाइल्ड लेबर : ग्लोबल एस्टिमेट्स 2020, ट्रेंड्स एंड दि रोड फॉरवर्ड' नामक एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है।
बाल श्रम समाप्त करने में ठहराव आया
इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में पहली बार बाल श्रम को समाप्त करने की दिशा में जो वैश्विक प्रगति हुई थी, वह रुक गई है। महामारी से पहले के चार सालों में बाल श्रमिकों की संख्या में 84 लाख की वृद्धि हुई है और पूरी दुनिया में अब बाल श्रमिकों की संख्या बढ़कर 16 करोड़ हो गई है। जबकि कोविड-19 महामारी के परिणामस्वरूप इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।