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बाल श्रम विरोधी दिवस: गंगवार बोले-2025 तक बाल श्रम उन्मूलन का लक्ष्य, सत्यार्थी का बजट बढ़ाने पर जोर

Fri, 11 Jun 2021 07:37 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम विरोधी दिवस की पूर्व संध्या पर कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन (केएससीएफ) द्वारा 'कोविड-19 और बाल श्रम उन्मूलन' विषय पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। इसमें बाल श्रम से जुड़े अहम मसलों पर चर्चा हुई। 
 
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कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन ने परिसंवाद का आयोजन किया - फोटो : self
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विस्तार
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शनिवार को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम विरोधी दिवस की पूर्व संध्या पर कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन ने एक परिसंवाद का आयोजन किया। इसमें केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने कहा कि सरकार ने 2025 तक बाल श्रम उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। कोविड-19 से बच्चों पर हुए असर को लेकर भी सरकार गंभीर है और उन्हें इससे उबारने में जुटी है। इस मौके पर नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने बच्चों के लिए बजट बढ़ाने पर जोर दिया। 

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परिसंवाद में नीति आयोग के सहायक सलाहकार एसबी मुनिराजू, हरियाणा के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव समीर माथुर, बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकारी निदेशक धनंजय टिंगल के अलावा राज्यों के बाल अधिकार आयोग और श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी बात रखी। आयोजन ऑनलाइन किया गया। इसका विषय था 'कोविड-19 और बाल श्रम उन्मूलन'।  इस अवसर पर कोविड-19 महामारी के दौरान बाल श्रम को कैसे बढ़ने से रोका जाए, इस पर एक एक्शन प्लान भी तैयार किया गया। साथ ही सरकार से एक टास्क फोर्स बनाने की मांग भी की गई।   

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री गंगवार ने कोविड-19 के दुष्प्रभाव से बच्चों को बचाने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार कोविड-19 महामारी से उपजी चुनौतियों का हल निकालने के लिए पूरी क्षमता से कोशिश कर रही है। महामारी से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे कुप्रभावों की वजह से बाल श्रम की घटनाओं में वृद्धि की संभावनाओं के दृष्टिगत हमें अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सजग रहना है कि कहीं यह आपदा हमारे बच्चों को बालश्रम की ओर न धकेल दे। 
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बाल श्रम के आंकड़ों पर चिंता व्यक्त करते हुए गंगवार ने कहा कि आईएलओ और यूनिसेफ ने मिलकर दुनिया में बाल मजदूरों की स्थिति पर जो रिपोर्ट जारी की है, वह चिंता बढ़ाने वाली है। बाल मजदूरों की समस्या को दूर करने के लिए अभी हमारी सरकार ने चार लेबर कोर्ट पास किए हैं। बाल श्रम उन्मूलन हमारी सरकार की प्राथमिकता है। 

गंगवार ने कहा कि 2025 तक बाल श्रम उन्मूलन का जो लक्ष्य रखा गया है उस दिशा में हम सतत कार्यरत हैं। बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में गृह मंत्रालय ने पेंसिल (इफेक्टिव इनफोर्समेंट ऑफ नो चाइल्ड लेबर) पोर्टल भी बनाए हैं। इसको और प्रभावी बनाने के लिए सरकार प्रयासरत है। उन्होंने बाल अधिकारों के लिए कैलाश सत्यार्थी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे उनके सुझावों को अमल में लाएंगे और उनके नेतृत्व में काम करने के लिए तैयार हैं।   

साझा प्रयासों से ही खत्म होगा बाल श्रम : सत्यार्थी

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बाल श्रम को समाप्त करने के लिए सरकार, समाज, निजी क्षेत्र और सिविल सोसायटी को एकजुट होकर साझा प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने मंत्रालयों, सिविल सोसायटियों, कारपोरेट और गैर सरकारी संस्थानों को 'टीम इंडिया अगेंस्ट चाइल्ड लेबर' का सदस्य बताते हुए कहा कि करोड़ों बच्चों को पीछे छोड़कर हम देश के विकास के बारे में कैसे सोच सकते हैं? यह स्वीकार करने योग्य नहीं है। यह मानवता के खिलाफ होगा। कोविड-19 महामारी ने हमारे बच्चों को सबसे अधिक असुरक्षित किया है। उन्होंने कहा कि वह सरकार से स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार का दर्जा देने और बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा की जरूरतों के लिए पर्याप्त बजटीय आवंटन करने का अनुरोध करते हैं। बाल मजदूरी कोई एकांगी समस्या नहीं है। इसका संबंध अशिक्षा और गरीबी से है। अगर बाल श्रम का खात्मा कर दिया जाए तो अशिक्षा और गरीबी अपने आप कम हो जाएगी। 
 
 
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आईएलओ की रिपोर्ट जारी

इस राष्ट्रीय परिसंवाद की प्रासंगिकता तब और बढ गई है जब आईएलओ और यूनिसेफ ने मिलकर दुनियाभर में बाल श्रमिकों की स्थिति पर 'चाइल्ड लेबर : ग्लोबल एस्टिमेट्स 2020, ट्रेंड्स एंड दि रोड फॉरवर्ड' नामक एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। 

बाल श्रम समाप्त करने में ठहराव आया
इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में पहली बार बाल श्रम को समाप्त करने की दिशा में जो वैश्विक प्रगति हुई थी, वह रुक गई है। महामारी से पहले के चार सालों में बाल श्रमिकों की संख्या में 84 लाख की वृद्धि हुई है और पूरी दुनिया में अब बाल श्रमिकों की संख्या बढ़कर 16 करोड़ हो गई है। जबकि कोविड-19 महामारी के परिणामस्वरूप इसके और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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