भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक दिबा चंद्र हरंगखावल ने बुधवार को विधानसभा से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ वे सातवें विधायक बन गए हैं जिन्होंने इस साल राज्य में सत्ताधारी गठबंधन को छोड़ा है।
धलाई के करमचेरा से आदिवासी विधायक हरंगखावल ने राज्य में विधानसभा चुनाव से महीनों पहले अपने इस्तीफे के लिए व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है। संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा, आज, विधानसभा अध्यक्ष रतन चक्रवर्ती मौजूद नहीं थे, इसलिए आज मैंने विधायक के रूप में अपना इस्तीफा विधानसभा के सचिव को सौंप दिया है। मैंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है।
हरंगखावल राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने 2018 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थाम लिया था। उन्होंने कहा, मैंने अभी तक अपने कदम के बारे में फैसला नहीं किया, लेकिन मैं निश्चित रूप से राजनीति में रहूंगा, क्योंकि मैं एक राजनीतिक व्यक्ति हूं।
हरंगखावल के अलावा इस साल की शुरुआत में वरिष्ठ नेता आशीष कुमार साहा ने भी भाजपा विधायक के रूप में इस्तीफा दे दिया था। इसके साथ भाजपा ने इस साल अपने चार विधायक खो दिए। साहा के अलावा विधायक सुदीप रॉय बर्मन और बुरबो मोहन त्रिपुरा ने भी इसी साल के शुरुआत में इस्तीफा दे दिया था।
सूरमा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक आशीष दास को उनके कथित कदाचार के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। राज्य में भाजपा की सहयोगी इंडिजीनियस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के भी तीन विधायकों धनंजय त्रिपुरा, बृषकेतु देबबर्मा और मेवार कुमार जमातिया ने इस्तीफा दे दिया था।
विधानसभा अध्यक्ष ने धनंजय त्रिपुरा और मेवार कुमार जमातिया के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया था। हालांकि बृषकेतु की अयोग्य घोषित कर दिया गया था। भाजपा प्रवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती ने बताया कि हरंगखावल लंबे समय से बीमार चल रहे थे और अपना काम नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने दावा किया, इससे आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की संभावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
राज्य की साठ सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 34 विधायक हैं, जबकि उसकी सहयोगी आईपीएफटी के पांच हैं। विपक्षी कांग्रेस के एक विधायक और माकपा के 15 विधायक हैं, जबकि पांच सीटें खाली हैं।