आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अमरावती इनर रिंग रोड मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और तेलुगु देशम पार्टी प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू को अग्रिम जमानत दे दी है। नायडू की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर बहस सुनने वाली कोर्ट ने अस्थायी जमानत दी और मामले में 16 अक्तूबर तक गिरफ्तारी न करने का अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने CID को अंगालू 307 मामले में कल तक कोई गिरफ्तारी नहीं करने का भी निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने सीआईडी विजयवाड़ा एसीबी कोर्ट द्वारा दायर इनर रिंग रोड याचिका पर पीटी वारंट पर रोक लगा दी।
इससे पहले इसी मामले में चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। बीते दिन उनसे सीआईडी ने पूछताछ की तो आज वे एसआईटी कार्यालय पहुंचे हैं। टीडीपी महासचिव नारा लोकेश इनर रिंग रोड मामले की जांच में शामिल होने के लिए अमरावती में विशेष जांच दल (एसआईटी) कार्यालय पहुंचे हैं।
क्या है मामला?
आरोप है कि आंध्र प्रदेश की 2014-2019 के बीच रही सरकार में उच्च अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त रहे और इस दौरान अमरावती के मास्टर प्लान की डिजाइनिंग और रिंग रोड और अन्य सड़कों को जोड़ने की योजना में धांधली की गई। इस मामले में कई अन्य आरोपी भी हैं। नारा लोकेश को इस मामले में 14वां आरोपी बनाया गया है। सीआईडी का आरोप है कि नारा लोकेश ने अमरावती इनर रिंग रोड के आदेश में बदलाव कर लाभ कमाया और घोटाले में अहम भूमिका निभाई।
नारा लोकेश के खिलाफ मामला दर्ज
सीआईडी ने ही टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू के बेटे नारा लोकेश के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस पर नारा लोकेश की कानूनी सलाहकार टीम ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की लेकिन अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया था और नारा लोकेश को सीआईडी की पूछताछ में सहयोग करने को कहा है। बता दें कि सीआरपीसी की धारा 41ए के तहत दिए गए नोटिस में नारा लोकेश को पूछताछ के लिए पुलिस अधिकारी के सामने पेश होना होगा।