एएमयू दलितों को आरक्षण दे वरना आर्थिक मदद बंद
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, जनजाति आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया ने पत्रकारों से कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति (एससी,एसटी) एवं अन्य पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने के मामले पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की नीयत साफ नहीं है। उन्होंने कहा, यदि एएमयू ने आरक्षण नहीं लागू किया तो वे यूजीसी से मिलने वाले अनुदान खत्म करने पर विचार करने की सिफारिश करेंगे। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामले में भी उनका आयोग पार्टी बनेगा।
कठेरिया मंगलवार को सर्किट हाउस में एएमयू के सह कुलपति प्रो. तबस्सुम शहाब एवं अन्य अधिकारियों के साथ एएमयू में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने पर बातचीत की। उन्होंने एएमयू के अधिकारियों से पूछा कि किस आधार पर इन वर्गों का आरक्षण रोक रखा है, स्पष्ट करें। यदि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान है तो उसका साक्ष्य दिखाएं। उन्होंने इसके लिए एएमयू प्रशासन को एक माह का वक्त दिया।
कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक विश्वविद्यालय में छात्रों को आरक्षण देें, क्योंकि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है यह केंद्रीय विश्वविद्यालय है। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने 1968 में अजीज बाशा केस में सर्वसम्मति से यह निर्णय दिया है। साथ ही भारत के संविधान के अधीन पारित सभी आदेश-निर्देश एएमयू में भी लागू है। एससी, एसटी एवं ओबीसी को यहां भी आरक्षण मिलना चाहिए लेकिन एएमयू में यह लागू नहीं किया गया है।