अमृतपाल की गिरफ्तारी से पहले उसके कई करीबियों को भी असम की जेल में ही भेजा गया है। अब जब रविवार को अमृतपाल हिरासत में लिया गया तो उसको भी असम के डिब्रूगढ़ जेल भेजा गया। सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर इन सभी कट्टरपंथियों को पंजाब से सैकड़ों किलोमीटर दूर क्यों भेजा जा रहा है। दरअसल इसकी सबसे बड़ी वजह सुरक्षा ही सामने आ रही है। पंजाब पुलिस से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से पकड़े गए इन सभी आरोपियों को असम की जेल में महफूज रखा जा रहा है, लेकिन पुलिस के इस बयान से हटकर एक दूसरा और महत्वपूर्ण पहलू भी है। पंजाब पुलिस महकमे से रिटायर हुए एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि पंजाब की जेल में खालिस्तानी समर्थक को रखना खतरे से खाली नहीं है। यही वजह है कि सुरक्षा के लिहाज से पंजाब से सैकड़ों किलोमीटर दूर की जेल को इन कट्टरपंथियों के लिए चुना गया। उक्त वरिष्ठ रिटायर्ड अधिकारी का कहना है कि नाभा जेल ब्रेक और बुडैल जेल ब्रेक कांड अभी भी सुरक्षा के लिहाज से कई तरह के सवाल उठाते ही रहते हैं।
दरअसल, पंजाब के नाभा जेल से नवंबर 2016 में खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के चीफ और खालिस्तानी समर्थक हरविंदर मिंटू समेत छह दुर्दांत अपराधियों को हमला कर जेल से छुड़ा लिया गया था। सिर्फ मिंटू ही नहीं बल्कि गुरप्रीत, विक्की गोदर और नितिन देओल समेत दो अन्य भी जेल से भाग गए थे। इस घटना से समूचे देश में खलबली मच गई थी। उसके बाद पंजाब की जेलों में सुरक्षा और उसकी मजबूती को लेकर के भी खूब चर्चा हुई थी। इसी तरह जनवरी 2004 में पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में आरोपी चंडीगढ़ की जेल में बंद जगतार सिंह हवारा, जगतार सिंह तारा और परमजीत सिंह भ्योरा तमाम सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए जेल में 94 फीट लंबी सुरंग खोदकर भाग गए थे। वरिष्ठ पत्रकार गुरजीत सिंह लांबा कहते हैं कि संभव है कि इन दोनों बड़ी घटनाओं के चलते ही कट्टरपंथी अमृतपाल को यहां की जेल में रखने से बचा गया। वह कहते हैं कि खालिस्तानी समर्थक और खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के मुखिया हरविंदर सिंह मिंटू को भी जेल से हमला कर छुड़ाकर ले जाया गया था। ऐसे में एक बात तो बिल्कुल स्पष्ट है कि सुरक्षा के लिहाज से अमृतपाल को पंजाब की जेल में रखना बहुत सुरक्षित नहीं होता।
अमृतपाल मामले में शुरुआत से ही नजर बनाए रखने वाले वरिष्ठ जीएस लांबा कहते हैं कि अगर अमृतपाल अपने समर्थकों के साथ अजनाला पुलिस चौकी से जाकर अपने समर्थक को छुड़ा सकता है तो उसके समर्थक भी किसी हद तक उसके लिए आगे आ सकते हैं। वह मानते हैं कि अमृतपाल को पंजाब की जेल की बजाए देश के किसी दूरदराज राज्य की जेल में रखना न सिर्फ पंजाब की कानून व्यवस्था के लिए बेहतर है बल्कि किसी भी तरीके के बिगड़े हुए माहौल को भी कंट्रोल करने में यह परिस्थितियां सही है। लांबा कहते हैं कि पंजाब में जेल की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई तरीके के सवाल उठते रहे हैं। इसमें चाहें जेल से कैदियों के भागने का मामला हो या फिर जेल में अन्य तरह की सुरक्षा का मामला। वो कहते हैं कि नाभा जेल कांड में तो पंजाब में जेल के सबसे बड़े अधिकारी को सस्पेंड तक किया गया था।
पंजाब की राजनीति को करीब से समझने वाले हरमोहिंदर चहल कहते हैं कि कानून व्यवस्था राज्य में बेहतर हो इसके लिए अमृतपाल का पंजाब की जेल से दूसरे राज्य की जेल में रहना ही बेहतर था। पंजाब पुलिस और सरकार ने भी इसी नजरिए से न सिर्फ अमृतपाल बल्कि उसके सभी करीबियों को आसान की जेल में रखा है। पंजाब पुलिस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में कई और लोगों की गिरफ्तारियां भी हो सकती है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह गिरफ्तारियां होने के बाद उनको भी पंजाब की जेलों के सिवाय अन्य सुरक्षित जिलों में ही रहने की तैयारियां की जा रही हैं।