आगामी लोकसभा चुनाव में बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के खिलाफ गृह मंत्री अमित शाह तानाबाना बुनेंगे। महागठबंधन से पार पाने के लिए नए और मजबूत जातीय समीकरण तैयार करने के लिए चिराग पासवान और जदयू से बाहर गए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा विस्तार इसी साल होने वाले गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद किया जाएगा। मजबूत और नया जातीय समीकरण तैयार करने का सिलसिला शुरू हो गया है। पार्टी राज्य में अगड़ा, अति पिछड़ा और दलित वोट बैंक ( 69 फीसदी आबादी) पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। इस क्रम में अगड़ा वर्ग से विजय सिन्हा तो अति पिछड़ा वर्ग से सम्राट चौधरी को विधानसभा और विधान परिषद में प्रतिपक्ष का नेता बनाया गया है। अभी प्रदेश अध्यक्ष, दोनों सदनों में मुख्य सचेतक और उपमुख्य सचेतक का नाम तय होना बाकी है।
सहयोगियों के लिए दिल बड़ा करेगी भाजपा
भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले अपने सहयोगियों को नुकसान पहुंचाने संबंधी आरोपों को खत्म करना चाहती है। शिवसेना और लोजपा में टूट, अकाली दल, जदयू सहित कुछ अन्य दलों का राजग से किनारा करने के कारण विपक्ष भाजपा पर क्षेत्रीय दलों को खत्म करने का आरोप लगा रहा है। इससे बचने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार में पार्टी सहयोगियों के लिए दिल बड़ा करेगी। इसके तहत चिराग को मंत्रिमंडल में लेने के साथ ही शिवसेना के दूसरे धड़े को भी टीम मोदी में दो पद देगी। इस क्रम में राजस्थान के हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की राजग में वापसी के आसार हैं।
चिराग बनेंगे मंत्री, आरसीपी को दोबारा मौका
सूत्रों के मुताबिक मोदी मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार में चिराग पासवान और आरसीपी को मंत्री बनाने पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। विस्तार से पहले पार्टी लोजपा के दोनों धड़ों के बीच सुलह कराएगी। राज्य में दलितों की आबादी करीब 16% है। महागठबंधन के पास दलित चेहरे के रूप में हम के मुखिया जीतन राम माझी हैं। ऐसे में पार्टी लोजपा में सुलह करा कर चिराग का कद बढ़ाना चाहती है। फिलहाल केंद्रीय मंत्रिमंडल में लोजपा से पशुपति पारस मंत्री हैं। योजना चिराग को मंत्री बनाने के साथ पशुपति को भी मंत्री बनाए रखने की है।