अपना दल (एस) अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने दिल्ली में अमित शाह से की मुलाकात
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किस वर्ग से कितने वोट मिले
दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए 80 में से 62 सीटें हासिल की थीं। दो सीटें उसकी सहयोगी दल अपना दल (एस) को भी प्राप्त हुई थीं। लोकनीति-CSDS के एक आंकड़े के अनुसार इस चुनाव में भाजपा को समाज के सभी वर्गों से वोट मिला था। ब्राह्मणों के कुल वोटरों का 82 फीसदी उसे मिला था तो राजपूत वोटरों के 89 फीसदी वोटों पर उसका अधिकार हासिल हुआ था।
लेकिन भाजपा की बड़ी ताकत बना ओबीसी और गैर-जाटव में मिला शानदार वोट। अनुमान है कि प्रदेश की 41.5 फीसदी आबादी वाले ओबीसी समुदाय के 72 फीसदी वोटरों ने भाजपा को ही वोट दिया था। इसी प्रकार कुर्मी समुदाय से 80 फीसदी, जाटव समाज से 17 फीसदी, अन्य दलित समुदाय से 48 फीसदी वोटरों ने भाजपा को वोट दिया था जिसके कारण अन्य विपक्षी दल उसके आसपास भी नहीं फटक पाए। अनुमान है कि इस चुनाव में आठ फीसदी मुस्लिम समाज (विशेषकर महिलाएं) ने भी भाजपा को वोट दिया था।
इसके आलावा वैश्य समुदाय के 70 फीसदी, अन्य सवर्णों के 84 फीसदी और जाट मतदाताओं में 91 फीसदी ने भाजपा को अपनी पसंद बनाया था। यादव समाज को परंपरागत तौर पर समाजवादी पार्टी का वोटर माना जाता है, लेकिन पिछले चुनाव में लगभग 23 फीसदी यादव मतदाताओं ने भाजपा को वोट दिया था।
सबको साथ लेना पार्टी की नीति
भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रेम शुक्ला के अनुसार भाजपा जातीय राजनीति में विश्वास नहीं करती है। वह समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करती है। सता में केंद्र में भी वह समाज के सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देती है। पार्टी की इसी नीति का परिणाम है कि उसे समाज के सभी वर्गों का समर्थन हासिल होता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ, सबका विश्वास की नीति में यकीन रखते हैं और पार्टी की यह नीति हमेशा बनी रहेगी।