कोई भी वायरस नाक के जरिए श्वसन नली से होते हुए शरीर में पहुंचता है। इसके बाद फेफड़ों से होते हुए पूरे शरीर में फैल जाता है। वहीं, मास्क पहनने पर मास्क की परतें हवा के लिए फिल्टर का काम करती हैं। इससे हवा फिल्टर होकर नाक के भीतर पहुंचती है। यह ज्यादा साफ होती है। मास्क की खासियत होती है कि इसमें लीकेज नहीं होता है, यानी सांस लेते वक्त किनारों से हवा अंदर नहीं जा सकती है। इससे वायरस नाक से होकर अंदर नहीं जा सकते। लेकिन दाढ़ी होने पर वायरस को अंदर जाने का रास्ता मिल जाता है।
उनकी चेतावनी से स्पष्ट होता है कि अगर आपकी दाढ़ी लंबी है, घनी है तो मास्क लगाने के दौरान चेहरा पूरी तरह कवर नहीं होगा। ऐसे में लोगों से बात करते वक्त या बाहर घूमते वक्त मास्क के किनारों से कोरोना वायरस संक्रमित कर सकता है।
क्लीन सेव पर फिट रहेगा मास्क
सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का मानना है कि चेहरे पर बाल जितने कम होंगे, मास्क उतनी ही अच्छी तरह से फिट होगा। ठीक ढंग से फिट होने पर मास्क हवा से फैलने वाली बहुत सी बीमारियों से बचा सकता है। एजेंसी फॉर टॉक्सिक सब्सटेंस एज एंड डिजीज रजिस्ट्री के पूर्व चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर रॉबर्ट अमलेर का कहना है कि ज्यादातर लोगों को मास्क पहनना नहीं आता है। अगर दाढ़ी या मूंछों के साथ मास्क लगाया जाए तो रेस्पिरेटर सील से लीकेज का खतरा काफी बढ़ जाता है।