संगठन की नकेल कसने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अब पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उप मुख्यमंत्रियों के तार कसेंगे। इस प्रयास में शाह ने 21 अगस्त को पार्टी शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों को बैठक के लिए दिल्ली बुलाया है।
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इस बैठक में पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों से कामकाज की रिपोर्ट के अलावा लोकसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा होगी। गुरूवार को शाह ने सरकार और संगठन के शीर्ष नेताओं संग बैठक कर लोकसभा चुनाव की रणनीति पर उन्हें अमल करने का निर्देश दिया था।
अब वे पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों के पेंच कसेंगे। ताकि वे जनता के बीच वे अपनी सक्रियता अभी से बढा दें। लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर शाह कोई भी ऐसा जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं कि जिससे की राज्य सरकारों की सत्ता विरोधी लहर पीएम मोदी की छवि पर असर करे।
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इसलिए संगठन और केंद्र सरकार के मंत्रियों को रणनीति समझाने के बाद वे पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की क्लास लेंगे। हालांकि मुख्यमंत्रियों की बैठक को भाजपा सामान्य बैठक करार दे रही है।
मुख्यमंत्रियों को सुशासन की पाठ पढाएंगे शाह
BJP
भाजपा आलाकमान ने पहले से ही पार्टी शासित सभी राज्यों को पीएम मोदी के विकास वाले एजेंडे को आगे बढाने का निर्देश दे रखा है। भाजपा शासित राज्यों में सुशासन का एजेंडा पटरी से न उतरे इसके लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हर तीन माह के बाद मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों की बैठक करते रहते हैं।
लेकिन इस दफे की बैठक विशेष मानी जा रही है। मिशन 2019 को सफल बनाने के लिए शाह अभी से लोकसभा चुनाव की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इसलिए वे मुख्यमंत्रियों के भी तार कसेंगे ताकि वे अपने-अपने राज्यों में अभी से मिशन मोड में जुट जाएं।
सूत्र बताते हैं कि इस बैठक में पीएम मोदी भी शामिल होकर पार्टी शासित मुख्यमंत्रियों को सुशासन का मंत्र देंगे।
लोकसभा चुनाव समय से पूर्व कराने पर हो सकती है चर्चा
Rajnath Singh
पार्टी के एक वरिष्ठ महामंत्री का कहना है कि मुख्यमंत्रियों के साथ शाह की बैठक पार्टी के सामान्य कार्यपद्धति का हिस्सा है। लेकिन आगामी महिनों में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव की तैयारी पर भी चर्चा हो सकती है।
बीते 2 अगस्त को झारखंड, पश्चिम बंगाल,बिहार और ओडीशा के सांसदों के साथ बैठक करते हुए पीएम मोदी ने सांसदों से आह्वान किया था कि वे जनता के बीच जाकर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एकसाथ कराने के मामले पर संवाद करें।
पीएम ने कहा था कि देश में लगातार चुनाव से शक्ति, समय और धन की हानि होती है। लोक सभा और विधान सभा के चुनाव एक साथ हो, इसके लिए जन-जागरण का वातावरण बनाने के लिए सार्वजनिक संवाद करना आवश्यक है|
सूत्र बताते हैं कि भाजपा अध्यक्ष अब इस मामले में पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भी राय सुन लेना चाहते हैं। वैसे पीएम मोदी चुनाव सुधार के लिए बडा कदम उठाने के मूड में हैं। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि वर्ष 2018 में होने वाले राज्यविधानसभा के चुनावों के साथ लोकसभा के चुनाव भी संपन्न कराए जाएं।
एक तरीका यह भी हो सकता है कि वर्ष 2018 के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में देरी कर 2019 में लोकसभा के चुनाव कराए जाएं। इससे 2019 के मध्य अंत में होने वाले हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली के विधानसभा चुनाव समय से पहले कराकर लोकसभा के साथ संपन्न कराए जा सकते हैं।
अगर ऐसा हुआ तो करीब दर्जन भर राज्यों के चुनाव लोकसभा के साथ संपन्न हो सकते हैं। पीएम के निर्देश के बाद कानून मंत्रालय इस मामले में कवायद शुरू भी कर दी है।
विधानसभा के चुनाव लोकसभा के साथ होने से भाजपा को मिलेगा लाभ
bjp
विधानसभा के चुनाव लोकसभा के साथ कराए जाने का मामला बेशक चुनाव सुधार से जुडा कदम है। मगर इससे भाजपा को बडा सियासी लाभ मिलेगा। राजस्थान, छत्तीसगढ और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं।
जहां विधानसभा के चुनाव में भाजपा को सत्ताविरोधी रूझान का सामना करना पड सकता है। राजस्थान में जनता के बीच राजे का जलवा जहां कम हुआ है। तो मध्यप्रदेश में शिवराज की चमक भी कमजोर पड रही है।
छत्तीसगढ में पार्टी की जीत पिछले दफे भी मात्र 1 प्रतिशत वोट के अंतर से हुई थी। इन तीनों ही राज्यों में भाजपा का मुकाबला सीधे कांग्रेस से है। इसलिए भाजपा आलाकमान यह जोखिम नहीं उठाना चाहेगी की लोकसभा से पहले उसे कोई बडी राजनीतिक परीक्षा देनी पडे।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा आलाकमान के जरिए कराए जा रहे तमाम सर्वे में जनता के बीच पीएम मोदी की जय जय हो रही है। लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अलग-अलग कंपनियों के जरिए कई सर्वे कराए हैं।
पार्टी के लिए खुशी की बात है कि सभी सर्वे में भाजपा को 300 से उपर लोकसभा की सीटें मिलती दिख रही हैं। इसीलिए शाह ने लोकसभा चुनाव 2019 के लिए 350+ का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सूत्र बताते हैं कि विधानसभा चुनावों को लोकसभा के साथ संपन्न कराकर भाजपा पीएम मोदी की छवि के जरिए राज्य विधानसभा चुनावों में भी बैतरनी पार करना चाह रही है। सर्वे के जरिए पार्टी आलाकमान तक पहुंची जनता की राय में पीएम मोदी की भ्रष्टाचार के खिलाफ बनी छवि सबसे अहम है।
जनता भी यह मान रही है कि अब तक उनपर एक भी दाग नहीं लगा है। बल्कि मोदी ने भारतीय राजनीति गुणत्मक बनाया है। जहां नकारात्मक मुद्दों के लिए कोई जगह नहीं बची है। यही वजह है कि विपक्ष का हर वार फेल हो रहा है। भाजपा अब मोदी की छवि के जरिए ही लोकसभा और विधानसभा का चुनाव लडने की तैयारी कर रही है।