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Naxal: '31 मार्च 2026 तक माओवादियों को जड़ से खत्म कर देंगे', छत्तीसगढ़ के नक्सल पीड़ितों से अमित शाह का वादा

Fri, 20 Sep 2024 12:29 PM IST
श्वेता महतो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमित शाह ने बताया कि सुरक्षा बलों ने माओवादियों के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल की। अब यह दिक्कत छत्तीसगढ़ के केवल चार जिलों में ही है। उन्होंने कहा कि माओवादियों ने एकबार पशुपतिनाथ (नेपाल से लेकर तिरुपति (आंध्र प्रदेश) तक कॉरिडोर बनाने की योजना तौयार की थी
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अमित शाह - फोटो : X/AmitShah
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नक्सलियों से हिंसा छोड़ने, हथियार डालने और आत्मसमर्पण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने अगर ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जाएगा। शाह ने अपने आवास पर छत्तीसगढ़ के नक्सली हिंसा के 55 पीड़ितों को संबोधित किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि माओवादी अपनी आखिरी सांग 31 मार्च 2026 को लेंगे। शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘बस्तर शांति समिति’ द्वारा बनाई गई एक डॉक्यूमेंट्री भी शेयर की।
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अमित शाह ने की नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से नक्सली हिंसा और विचारधारा मिटाने का फैसला किया। उन्होंने कहा, "मैं नक्सलियों को हिंसा छोड़ने, हथियार डालने और आत्मसमर्पण करने की अपील करता हूं, जैसा कि पूर्वोत्तर के उग्रवादियों ने किया। अगर आप हमारी बात नहीं मानते हैं तो इस खतरे को खत्म करने के लिए ऑल आउट ऑपरेशन चलाया जाएगा।"

अमित शाह ने बताया कि सुरक्षा बलों ने माओवादियों के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल की। अब यह दिक्कत छत्तीसगढ़ के केवल चार जिलों में ही है। उन्होंने कहा कि माओवादियों ने एकबार पशुपतिनाथ (नेपाल) से लेकर तिरुपति (आंध्र प्रदेश) तक कॉरिडोर बनाने की योजना तौयार की थी, लेकिन मोदी सरकार ने उनकी इस योजना को बर्बाद कर दिया। 
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नक्सल हिंसा प्रभावित लोगों के लिए कल्याणकारी योजना बनाने की तैयारी
गृह मंत्रालय जल्द ही छत्तीसगढ़ के नक्सल हिंसा प्रभावित लोगों के लिए एक कल्याणकारी योजना बनाने की तैयारी में है। इसे लेकर गृह मंत्रालय राज्य सरकार के संपर्क में हैं। शाह ने कहा, "हमसे जितना हो पाएगा, हम नौकरियों, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य क्षेत्रों में अपने कल्याणकारी उपायों के माध्यम से आपकी मदद करेंगे।"

लोगों को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, "नक्सलियों ने अपने फायदे के लिए अनेक लोगों के अधिकारों को तो छीना ही, साथ ही उनकी हिंसा, उनकी आईईडी, उनकी गोलियों और बारूदों ने कई लोगों को मौत के घाट उतारा या जीवन भर के लिए दिव्यांग बना दिया। सुरक्षा बलों के द्वारा मारे गए उग्रवादियों के ह्यूमन राइट्स की बात करने वाले लोगों को बिना आंख, बिना हाथ, बिना पैर के जीवन जीने के लिए मजबूर इन लोगों के ह्यूमन राइट्स नजर नहीं आते। छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा से प्रताड़ित बहनों-भाइयों से संवाद कर अत्यंत भावुक हूं। मैं आप सभी को विश्वास दिलाता हूं कि मोदी सरकार दो साल के अन्दर नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त कर आपके क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए संकल्पित है।"

उन्होंने आगे कहा कि नक्सलवाद की एक ही विचारधारा है - विध्वंस और हिंसा। ह्यूमन राइट्स की आड़ में अपने लिए ही संवेदना बटोरना नक्सलियों की रणनीति रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के हिंसा के शिकार इन लोगों के जख्म नक्सलवाद की अमानवीयता और क्रूरता के जीवंत प्रतीक हैं।
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