भारतीय कानूनों के उल्लंघन में ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन का अमेरिकी अधिकारियों ने बचाव किया था। फरवरी में प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी ने कानूनों के खिलाफ जाकर कुछ खास विक्रेताओं की तरजीह दी थी।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि दफ्तर द्वारा जारी ई-मेल से हुआ खुलासा
इसी मुद्दे पर अमेजन के बचाव में अमेरिका के नई दिल्ली स्थित दूतावास के अधिकारियों ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जरिए जलवायु परिवर्तन पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के दूत की जॉन कैरी के लिए ई-मेल से नोट भेजा था।
अमेरिका के सूचना अधिकार कानून के तहत यूएसटीआर के कार्यालय से जारी इन ई-मेल के मुताबिक, दूतावास अधिकारियों ने 18 फरवरी को भेजे ई-मेल में शामिल नोट में बताया था कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ ऐसे आरोपों की जांच के बाद कुछ भी गलत नहीं पाया है। खास यह है कि उसी दिन कैरी की भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से फोन पर बातचीत होनी थी।
अमेरिकी अधिकारियों को चिंता यह थी कि गोयल कैरी के सामने अमेजन का मुद्दा उठा सकते हैं। इसलिए हड़बड़ी में दूतावास की तरफ से यह नोट भेजा गया। अमेरिकी दूतावास के अधिकारी थॉमस कार्नेगी ने यूएसटीआर थॉमस कार्नेगी ने यूएसटीआर को भेजे एक इ-मेल में बताया थी उन्होंने अमेजन इंडिया में सरकारी मामलों के प्रभारी के साथ मुद्दे की पड़ताल करने के बाद कैरी के लिए तैयार किए गए नोट को 'सच और सटीक' पाया है।
रिपोर्ट को बताया सनसनीखेज
दूतावास अधिकारी इंजेनेरी ने 16 मार्च को भी यूएसटीआर और अन्य अमेरिकी अधिकारियों को एक ई-मेल में अमेजन संबंधी रिपोर्ट की भाषा को सनसनीखेज बताया था। साथ ही अमेजन की वर्ष 2018 से पहले की गतिविधियों पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह भले ही आक्रामक थीं। लेकिन उसकी गतिविधियां गैरकानूनी नहीं थीं। उधर, अमेजन अपने बचाव में कहता रहा है कि वह अपने प्लेटफार्म पर किसी भी विक्रेता को तरजीह नहीं देता।