कोरोना एक नई बीमारी है और इसे पूरी तरह समझने में लंबा वक्त लगेगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा गठित नेशनल टास्क फोर्स के ऑपरेशन रिसर्च ग्रुप के हेड डॉ एनके अरोड़ा बताते हैं कि कोरोना में जिस तरह के लक्षण दिखे हैं, उस तरह के लक्षण किसी दूसरे वायरल संक्रमण में देखने को नहीं मिले हैं।
संक्रमण के कम और अधिक समय तक होने वाले दुष्प्रभाव को लेकर अध्ययन जारी है। वे बताते हैं कि कोरोना से ठीक होने वाले लोगों में छह महीने से 1 साल तक कुछ नए लक्षण दिख सकते हैं।
दोबारा कोरोना संक्रमण दुर्लभ
डॉक्टर अरोड़ा ने बताया कि भारत समेत दुनिया के कई देशों में हुए अध्ययन से पता चला है कि कोरोना का दोबारा संक्रमण दुर्लभ है। ऐसा इसलिए क्योंकि संक्रमण के बाद 3 से 9 महीने तक शरीर में एंटीबॉडीज रहती है जो संक्रमण से बचाव करती हैं, हालांकि री-इंफेक्शन के कुछ मामले सामने आए हैं लेकिन ऐसे लोग या टीका लगवा चुके लोगों में देखा गया है कि संक्रमण गंभीर नहीं हुआ और लंबे समय तक परेशानी नहीं हुई।
संक्रमितों में यह तकलीफ जादा
वरिष्ठ इंटर्नल मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ मुबाशीर अली बताते हैं कि कोरोना से ठीक होने वाले लोगों में लंबे समय तक थकान सांस, मस्तिक संबंधी कोई ना कोई लक्षण रहता है। कुछ मरीजों में लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी तकलीफें दिख रही हैं। ये स्पष्ट नहीं है कि ऐसा कितने लोगों के साथ हो रहा है। शोध के अनुसार, 10 में एक रोगी को स्वस्थ होने के बाद भी तीन सप्ताह या इससे ज्यादा समय तक दिक्कत रह सकती है।
बी1.617 स्ट्रेन अधिक संक्रामक
दिल्ली में इमरजेंसी मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉक्टर सुशांत छाबड़ा बताते हैं कि बी1.617 स्ट्रेन अधिक संक्रामक है। इससे संक्रमित लोगों के फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। पूरी तरह ठीक होने में 4 से 5 माह का वक्त लग सकता है। पिछले साल अक्टूबर-नवंबर में संक्रमित हुए कुछ लोग दूसरी लहर में भी संक्रमण की चपेट में आ गए।
डॉक्टर छाबड़ा बताते हैं कि दोबारा कोरोना संक्रमण संभव है ऐसा इसलिए क्योंकि इम्यूनिटी हमेशा के लिए नहीं बनी है। 3 से 4 माह तक बचाव संभव है। ऐसे में टीका लगवाना सबसे बेहतर विकल्प है। हर व्यक्ति को टीका लगाना चाहिए ताकि उसका शरीर वायरस से लड़ने के लिए तैयार है। अच्छी बात यह है कि अभी तक यह कहा जा रहा है कि वैक्सीन के खिलाफ कारगर है।