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अमेरिका ने भारत को दिया झटका, आतंकवाद के खिलाफ मोर्चाबंदी में पाकिस्तान को दी राहत

Wed, 15 Nov 2017 09:05 AM IST
गुंजन कुमार
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मोदी-ट्रंप
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फिलीपींस में चल रहे आसियान सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिश्ते प्रगाढ़ करने की गर्मजोशी और औपचारिक रिश्तों से परे जाकर साथ निभाने के वादे को करारा झटका लगा है। अमेरिकी कांग्रेस ने फैसला किया है कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तोयबा को छोड़ सिर्फ हक्कानी गुट पर कार्रवाई करे तो उसे 70 करोड़ डॉलर की अटकी हुई अमेरिकी सहायता दे दी जाएगी। इससे पहले सितंबर में अमेरिका ने इस सहायता के लिए अफगानिस्तान में आतंक मचाने वाले हक्कानी के साथ भारत में केंद्रित लश्कर- ए- तोयबा पर पाकिस्तानी कार्रवाई की कड़ी शर्त लगाई थी।
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आतंक के खिलाफ एकजुट हों आसियान देश, पीएम मोदी ने बताया इसे बड़ी चुनौती

विदेश मंत्रालय अमेरिका के इस पैंतरे से निराश और चिंतित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत दोभाल के एसियान सम्मेलन से लौटने के बाद भारत इसपर कूटनीतिक विरोध दर्ज कराएगा। गौरतलब है कि तालिबान का हक्कानी गुट अफगानिस्तान में अमेरिका के खिलाफ सख्त है। जबकि 26/11 के मुंबई हमले जैसे आतंकी वारदात को अंजाम देने वाला लश्कर का पूरा फोकस भारत पर है।
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विशेषज्ञ बोले- यह भारत के लिए सबक

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उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह फैसला अमेरिकी सुरक्षा तंत्र और पाकिस्तान के बीच हुए ताजा मोलभाव का नतीजा है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अफगानिस्तान में सघन कार्रवाई के लिए अमेरिका को पाकिस्तान की जमीन और सामरिक मदद के जरुरत है। अमेरिका के गठबंधन सहायता निधि (सीएसएफ) के नाम पर यह आर्थिक मदद अफगानिस्तान में पाकिस्तानी समर्थन के एवज में दी जा रही है। अमेरिकी कांग्रेस ने नेशनल डिफेंस ऑथराईजेशन एक्ट के तहत यह फैसला लिया है। भारत को शक है कि लश्कर को पाकिस्तानी कार्रवाई की सूची से हटाकर अमेरिका पाक की शर्त के आगे झुक गया है। जबकि अमेरिका अफगानिस्तान में अपनी लड़ाई में भारत का भी भरपूर सहयोग चाहता है।

कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञ और पाकिस्तान में भारत के राजदूत रहे जी पार्थसारथी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर सबक सिखाया है कि आतंकवाद के मामले में भारत को किसी का भी आंख मूंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए। अमेरिका का यह कदम वाकई चिंतित करने वाला है। भारत को इसका विरोध करना होगा। जबकि अमेरिका पूरी दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ एक साथ खड़े होने की बात कर रहा है। ऐसे में भारत को यह पूछना होगा कि उसके लिए अमेरिका का अलग पैमाना क्यूं है। पार्थसारथी ने कहा कि ट्रेंप ने फिलीपींस में सिर्फ दक्षिण एशिया में आतंकवाद की बात की है। वह चाहते हैं कि भारत अमेरिका की तरह बड़ी सेना तैयार करे। लेकिन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सिर्फ अपने उपर केंद्रित फैसले से विश्व बिरादरी का भरोसा उठेगा।
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