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न्यूज राउंडअप: उत्तराखंड की राजनीति में नया मोड़, बिकेगी सुब्रत रॉय की संपत्ति, पढ़ें खबरें

Tue, 29 Mar 2016 07:47 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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हरीश रावत और विधायक - फोटो : SanjayNegi/AmarUjala
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नैनीताल हाईकोर्ट के बड़े फैसले ने उत्तराखंड की सियासत ने फिर हलचल मचा दी है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा ‌है कि विधानसभा में 31 मार्च को सरकार बनाने के लिए मतदान होगा। कोर्ट ने सभी 70 विधायकों को आगामी 31 मार्च को विधानसभा में मौजूद रहने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने डीजीपी को विधानसभा की सुरक्षा का ध्यान रखने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई आगामी चार अप्रैल को होगी। कांग्रेस के नौ बागी विधायक भी इस मतदान में शामिल हो सकेंगे। इसके लिए नैनीताल हाईकोर्ट ऑब्जर्वर की नियक्ति करेगा। सुनवाई के बाद अभिषेक मनु‌सिंघवी ने बताया कि हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन के बावजूद राज्यपाल के आदेश को कार्यांवित करते हुए तिथि बदली है।
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अब हरीश रावत को 28 की जगह 31 मार्च को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा। उन्होंने बताया कि कांग्रेस की निलंबित विधायकों का निलंबन जारी रहेगा, लेकिन वह मतदान करेंगे और उनके मतदानों को अलग रखा जाएगा। उत्तराखंड के पूर्व सीएम रावत की याचिका पर मंगलवार को दूसरे दिन भी नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। उधर, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में विधायकों की खरीद फरोख्त के मामले में जनहित याचिका दायर कर दी गई है। इस याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई होगी। याचिका उत्तराखंड विधायकों के खरीद फरोख्त के मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने हाईकोर्ट में सोमवार को याचिका दायर कर 27 मार्च को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू करने को चुनौती दी और उसे खत्म करने की भी गुजारिश की। इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता राकेश थपलियाल ने कहा कि इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी पक्ष रखेंगे। इस आधार पर कोर्ट ने उन्हें एक दिन का समय देते हुए मंगलवार को सुनवाई के लिए तिथि नियत की।
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सोमवार को न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। पूर्व सीएम हरीश रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 27 मार्च 2016 को राष्ट्रपति शासन लागू करने को चुनौती देते हुए उसे समाप्त करने की मांग की। याचिकाकर्ता की ओर से विश्वासमत हासिल करने के लिए पूर्व में निर्धारित तिथि 28 मार्च को बहुमत सिद्ध करने की याचना की गई। राज्यपाल तथा केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से की गई संस्तुति को निरस्त करने की मांग गई। याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति शासन राजनैतिक आधारों पर नहीं लगाया जा सकता है, जबकि सत्ताधारी पार्टी का सदन में बहुमत है। कहा कि भाजपा कुछ असंतुष्टों की मदद को लेकर स्वयं सरकार बनाने का षड्यंत्र कर रही है।

राज्यपाल ने पहले 28 मार्च को सदन में बहुमत सिद्घ करने को कहा था, लेकिन बिना बहुमत साबित करने का अवसर दिए राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया तथा बिना सुनवाई व जांच के रातों रात अधिसूचना जारी कर राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया, जो गलत है। याचिका में कहा गया कि राष्ट्रपति शासन की घोषणा को निरस्त किया जाए और केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश का पूरा रिकार्ड तलब किया जाए तथा प्रदेश की सरकार को बहाल किया जाए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि संविधान की धारा 356 तभी लगाई जा सकती है, जब कोई इमरजेंसी आ जाए, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट से पैरवी करने आए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से राष्ट्रपति शासन को राजनीति से प्रेरित बताया और निरस्त करने की मांग की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से झारखंड, उत्तराखंड आदि राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला दिया गया, जिसमें एसआर बाम्बे, रघुवर प्रसाद, जगदंबिका पाल सहित कई निर्णयों की कॉपी कोर्ट में पेश की। केंद्र सरकार के अधिवक्ता राकेश थपिल्याल की ओर से सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदिकोई परिस्थितियां पैदा होती हैं, तो केंद्र राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है। इसके अलावा उनके द्वारा जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। जिसके बाद उन्होंने कहा कि इस प्रकरण पर आगे की सुनवाई एडिशनल सॉलिसिटर जनरल करेंगे।

इस आधार पर कोर्ट ने उन्हें कुछ घंटों का समय दिया। इस प्रकरण पर मंगलवार को 10.15 बजे से मामले की सुनवाई जारी हो जाएगी। बता दें कि हाईकोर्ट में इस पर सोमवार को सुबह 11 बजे से सुनवाई हुई और शाम सवा तीन बजे तक जारी रही।

सुब्रत रॉय की संपत्ति शर्तों के साथ बेचने की अनुमति मिली

देश के उच्चतम न्यायालय ने सेबी को सहारा समूह की संपत्तियां बेचने का अधिकार दे दिया - फोटो : Reuters
देश के उच्चतम न्यायालय ने सेबी को सहारा समूह की संपत्तियां बेचने का अधिकार दे दिया है। पर उच्चतम न्यायालय ने सेबी को आदेश दिया है कि सहारा समूह की संपत्ति तभी बेची जाए, जब सर्किल रेट के आधार पर संपत्ति का कुल मूल्‍य 90 फीसदी से ऊपर हो। अगर 90 फीसदी से कम बोली लगती है तो सेबी इन संपत्तियों की नीलामी न करें।

सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को अधिकार देते हुए कहा है कि सुब्रत रॉय की जेल से रिहाई के लिए संपत्तियों की नीलामी सेबी कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सेबी सहारा समूह की 86 संपत्तियां बेचने की कार्रवाई शुरू करेगा जिससे सुब्रत रॉय की जमानत के लिए जरूरी पैसे का इंतजाम किया जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

'देश छोड़ने से पहले माल्या से मिले थे मोदी के मंत्री'

राहुल गांधी ने मोदी सरकार को निशाना बनाते हुए सीधे पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोला - फोटो : pti
असम में चुनावी रैली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने विजय माल्या मामले को लेकर और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। राहुल गांधी ने मंगलवार को असम के कार्बी आंग्लांग में एक चुनावी जनसभा को संबोधति किया।

जनसभा में राहुल गांधी ने मोदी सरकार को निशाना बनाते हुए सीधे पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। राहुल ने कहा कि मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले देश की जनता से वादे किए थे उन पर वे खरे नहीं उतर पाए हैं।

मोदी सरकार ने जनता के साथ धोखा किया है। राहुल ने कहा कि कांग्रेस सरकार की वजह से अब तक असम में शांति है। उन्होंने कहा कि जनता देख रही है कि हरियाणा में बीजेपी सरकार के सत्ता में आते ही किस तरह वहां हिंसा और अशांति का माहौले है, लेकिन कांग्रेस सरकार असम में शांति कायम रखेगी।

कहा कि भाजपा और आरएसएस देश में एक विचारधारा थोपना चाहती है लेकिन भारत किसी एक विचारधारा से ताल्लुक नहीं रखता है यह विविधताओं और विभिन्न भाषाओं का देश है।

वहीं राहुल गांधी ने विजय माल्या के देश छोड़ने पर मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया और कहा कि देश छोड़ने से पहले मोदी के मंत्रियों ने संसद में विजय माल्या ने मुलाकात की थी।

बता दें कि आगामी अप्रैल माह में असम में विधानसभा चुनाव होने हैं। सत्तारूढ कांग्रेस की असम में 126 सीट हैं, और असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस राज्य में चुनाव लड़ रही है।

प्लेन हाईजैक में जरिए बनाए गए सभी लोगों को रिहा करवा लिया गया

मिस्र का प्लेन हाईजैक - फोटो : Reuters
एजिप्ट एयर ने जानकारी देते हुए बताया है कि प्लेन हाईजैक के जरिए बंधक बनाए गए सभी लोगों को रिहा करवा लिया गया है। वहीं प्लेन हाईजैक करने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया है। प्लेन हाईजैक करने के बाद विमान को लारनाका एयरपोर्ट पर उतारा गया था। मिस्र के एक हवाई जहाज को हाइजैक कर लिया गया था। इस विमान में अभी 81 लोग सवार थे।
  
मिस्र के मीडिया के मुताबिक व्यक्ति ने जहाज अपनी पत्नी के लिए हाईजैक किया था। इजिप्ट की मीडिया के मुताबिक प्लेन को हाइजेक करने वाले की पहचान इब्राहिम सामहा के रूप में की गई है। इब्राहिम सामाहा खुद मिस्र का रहना वाला है। इब्राहिम की उम्र 27 व 28 के बीच में हैं। वह प्लेन की सीट नंबर 38 के पर बैठा हुआ था।  मिस्र का विमान MS181 के अपहरणकर्ता इब्राहिम समाहा ने साइप्रस में राजनीतिक शरण की मांग की थी। वहीं साथ ही अपनी पूर्व पत्नी को भी देखने की मांग रखी है। वहीं साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस अनसतासियादिस ने विमान अपहरण के बारे में कहा कि विमान अपहरण का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा कि जहाज को हाइजैक करने वाला व्यकित आतंकवादी नहीं है। वो एक मूर्ख है। आतंकवादी पागल होते हैं वो बेवकूफ नहीं होते हैं। यह व्यक्ति बेवकूफ है।

साइप्रस ने आतंकियों को बातचीत करने का प्रस्ताव दिया था। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबरों के मुताबिक प्लेन को हाइजैक करने वाले आतंकी ने अपने शरीर पर विस्फोटक बांध रखा था। आतंकी ने जिस विमान का अपहरण किया है वो एयरबस 320 है। इजिप्ट एयरलाइंस ने अपना जहाज हाइजैक होने की अधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है। इजिप्ट एयरलाइंस ने ट्वीट करके बताया है कि उनका जहाज MS181 हाइजैक हो गया।

साइप्रस सरकार के मुताबिक इजिप्ट एयरप्लेन के पायलट उमर अल-गमाल ने अधिकारियों को बताया कि उन सभी को प्लेन में मौजूद एक यात्री ने धमकी दी जोकि विस्फोटक बेल्ट पहने हुआ था। उसने जबरदस्ती करने प्लेन को लारनाका में उतारने के लिए बाध्य किया।

इजिप्टएयर ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि अभी भी आतंकियों से बातचीत जारी है। अभी तक के समझौते के तहत सभी यात्रियों को छोड़ दिया गया है। जबकि क्रू मेंबर और विदेशी नागरिकों को बंधक बना कर रखा गया है।  इजिप्टएयर ने ट्वीट के जरिए इमरजेंसी कॉल सेंटर नंबर और इंटरनेशनल नंबर की जानकारी दी है। इस पर लोग अपने घरवालों के बारे में पूरी जानकारी ले सकते हैं।

पठानकोट में पाक टीम को केवल वही जगह दिखाई

पाकिस्तानी जांच टीम में 11-12 लोग शामिल - फोटो : amarujala
पठानकोट में जांच के सिलसिले में आई पाकिस्तानी टीम को केवल वही जगह दिखाई जा रही है, जहां से आतंकी आए थे। इससे पहले कांग्रेस-आप और लोगों के विरोध के बीच पाकिस्तान से आई जांच करीब 11 बजे टीम एयरबेस कैंप पहुंच गई थी। पठानकोट एयरबेस पर जनवरी में हुए आतंकी हमले की जांच के लिए ये टीम आज पठानकोट में आई है।

जांच टीम को बस के माध्यम से एयरबेस के मुख्य गेट की बजाय पीछे की दीवार तोड़कर बनाए अस्थाई रास्ते से अंदर ले जाया गया है। ये अस्थाई रास्ता धीरा पुल के पास बनाया गया है। पाकिस्तानी जांच टीम में 11-12 लोग शामिल हैं। जिस नदी को पार कर आतंकी एयरबेस कैंप में घुसे थे, वो जगह जांच टीम को दिखा दी गई है। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने सोमवार को कह दिया था कि जांच के लिए आई संयुक्त जांच टीम को सिर्फ हमला के दौरान हुए मुठभेड़ वाली जगह पर जाने की इजाजत दी गई है।

वह पठानकोट एयरबेस के संवेदनशील जगहों पर नहीं जा सकेगी। वहीं पाक टीम ने पठानकोट हमले में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद की भागीदारी का अब तक खंडन नहीं किया है। पाकिस्तान की ज्वाइंट इन्वेस्टिगेशन टीम (JIT) में आईएसआई अधिकारी के साथ पाकिस्तान पुलिस के अतिरिक्त आईजी मोहम्मद ताहिर, लाहौर के आईबी के उप निदेशक अजीम अरशद, मिलिट्री इंटेलीजेंस के ले. कर्नल इरफान मिर्जा और गुजरांवाला के सीटीडी के जांच अधिकारी शाहिद तनवीर शामिल हैं।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन शुरू
इस बीच, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और पठानकोट के लोगों ने एयरफोर्स के स्टेशन के बाहर पाक अफसरों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पाकिस्तानी जेआईटी में आईएसआई के लेफ्टिनेंट तनवीर अहमद की मौजूदगी को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को कहा था, ''आश्चर्यजनक है कि भारत सरकार ने दोषियों को ही जांच की इजाजत दे दी है।'' अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, ''ISI को बुलाकर मोदी सरकार ने पाक के आगे घुटने टेके। मोदी सरकार ने शहीदों की शहादत की सौदेबाजी की है। भारत के लोग ये कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।''

एयरबेस आतंकी हमले की जांच के लिए पाकिस्तान की टीम सिविल अस्पताल में रखे आतंकियों के शव भी देख सकती है। इसी कड़ी में सोमवार को एनआईए की एक टीम ने सिविल अस्पताल का दौरा कर आतंकियों के शवों का जायजा लिया। डीसी का कहना तैयारी पूरी कर ली गई है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पाक टीम का रूट नहीं बताया गया है।

अधिकारियों सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान की ज्वाइंट इंवेस्टिगेशन टीम (जेआईटी) मंगलवार सुबह एयरबेस पर पहुंचेगी। वह पहले उस जगह का निरीक्षण करेगी जहां से आतंकी एयरबेस में दाखिल हुए थे। इसके बाद आतंकियों से मुठभेड़ वाले स्थान का जायजा लेगी। यह भी कहा जा रहा है कि टीम सिविल अस्पताल में आतंकियों के शवों का भी निरीक्षण कर सकती है। फिलहाल अभी तक इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन के पास कोई सूचना नहीं है।

वहीं एनआईए टीम ने सोमवार को अस्पताल के शवगृह में आतंकियों की लाशों का एक बार फिर से निरीक्षण किया। साथ ही आतंकियों का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से मुलाकात की। एसएमओ डॉ भूपिन्द्र सिंह ने बताया एनआईए टीम आतंकियों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को एक बार फिर से चेक किया है। पाकिस्तानी टीम भी जांच के लिए आ सकती है। अस्पताल ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। डीसी अमित कुमार ने कहा कि एयरफोर्स अथॉरिटी ने हमें पाकिस्तानी जांच टीम के आने के बारे में 24  मार्च को सूचित कर दिया था। अभी तक हमें किसी तरह का कोई भी ऑफिशियली रूट नहीं मिला है। दिल्ली से टीम चंडीगढ़ आएगी और इसके बाद ही यहां आने के बारे में पूरा पता चल सकेगा। जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

‘अमेरिकी दबाव में आई टीम’
 पाकिस्तानी टीम के दौरे को महज दिखावा बताते हुए पूर्व सैनिक सागर सिंह सलारिया ने कहा कि यह खानापूर्ति और एक राजनीतिक स्टंट है। दरअसल, यह अमेरिका की ओर से बनाया गया दबाव है। इससे समय और पैसे की बर्बादी हो रही है।

हरियाणा में मिलेगा जाटों को आरक्षण

मनोहर लाल खट्टर, ह‌रियाणा के मुख्‍ययमंत्री - फोटो : amar ujala
हरियाणा में जाटों को आरक्षण मिलेगा। विधानसभा में आज पेश हुए जाट आरक्षण बिल को पास कर दिया है। सरकार के इस फैसले का लाभ जाटों के साथ गैर जाटों को भी मिलेगा। सूत्रों मुताबिक गैर जाट विधायकों और मंत्रियाें के दबाव में सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है। लिहाजा, बीसी-सी श्रेणी के तहत जाटों के साथ जट सिख, त्यागी, बिश्नोई और रोड़ को भी दस प्रतिशत आरक्षण का लाभ होगा। इसके अलावा सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को वैधानिक दर्जा देने का भी फैसला लिया है।

सोमवार को मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया था। बैठक में जाट आरक्षण प्रारूप पर सहमति बनने के बाद मनी बिल राज्यपाल के पास भेज दिया गया था। अब यह बिल 31 मार्च से पहले कभी भी विधानसभा में पेश होना था। आज सदन में बिल आते ही पास हो गया।

सूत्रों के मुताबिक आर्थिक तौर से कमजोर वर्ग के लिए पहली और दूसरी श्रेणी की नौकरियों में आरक्षण दो प्रतिशत तक बढ़ाया है। यह लाभ बीसी-ए और बीसी-बी श्रेणी के लोगों को भी मिला है। उनके आरक्षण में एक-एक प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। पहली और दूसरी श्रेणी की नौकरियों में बीसी-सी की नई कैटेगरी में शामिल पांच जातियों को छह प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। तीसरी और चौथी श्रेणी में करीब 17 प्रतिशत आरक्षण में बढ़ोतरी हो गई है, जिसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा जाएगा।

वर्ग--------पहले प्रतिशत--------अब प्रतिशत
बीसी-ए--------10--------11
बीसी-बी--------05--------06        
बीसी-सी--------00--------06
अनुसूचित जाति--------20--------20
ईडब्ल्यूएस--------05--------07
------------------------------
कुल --------40--------50

तीसरी और चौथी श्रेणी में ऐसे मिलेगा आरक्षण

वर्ग               पहले प्रतिशत         अब प्रतिशत
बीसी-ए           16                    16
बीसी-बी          11                    11
बीसी-सी          00                    10
अनुसूचित जाति   20                    20
ईडब्ल्यूएस        10                    10
------------------------------
कुल              57                     67    

कोट:
कैबिनेट की बैठक में सभी पहलुओं पर चर्चा हो गई है। सदन की कार्यवाही 31 मार्च तक चलेगी। इस बीच आज ये बिल पास हो गया है।
-मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री हरियाणा
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चार अप्रैल को शपथ ले सकतीं हैं महबूबा मुफ्ती

महबूबा मुफ्ती - फोटो : अमर उजाला
रियासत में चार अप्रैल को नई सरकार का शपथ समारोह संभव है। पीडीपी के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो महबूबा मुफ्ती चार अप्रैल को शपथ ले सकतीं हैं। बताया जा रहा है कि दिल्ली से पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के आने का इंतजार है। 

उनकी वापसी सुनिश्चित होने के बाद शपथ ग्रहण समारोह की तिथि की घोषणा कर दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि महबूबा रियासत की पहली मुख्यमंत्री होने के साथ ही देश की पहली मुस्लिम महिला मुख्यमंत्री भी होंगी। हालांकि, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा ने चार अप्रैल को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होने के संबंध में किसी तरह की जानकारी होने से इनकार किया। 

वहीं, पीडीपी-भाजपा के बीच मंत्रालयों के पेच का मसला फिलहाल उलझा ही हुआ है। अब यह मसला भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दरबार तक पहुंच गया है। दरअसल, पीडीपी पुराने फार्मूले पर ही मंत्रालयों के बंटवारा चाहती है। 

जबकि भाजपा इस बार मंत्रिमंडल में पीडीपी की बराबरी के अलावा गृह, योजना और पर्यटन विभाग भी चाहती है। इसके चलते ही सरकार बनाने का दावा पेश करने के तीसरे दिन भी शपथ ग्रहण की तिथि तय नहीं हो पाई। सूत्रों ने बताया कि प्रदेश भाजपा की ओर से इस मामले से राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को अवगत करवा दिया गया है। 

भाजपा नेताओं का दावा है कि राज्य विधानसभा में भाजपा और पीडीपी की सीटें बराबर हैं। मुख्यमंत्री पद पीडीपी के पास है। ऐसे में भाजपा नेताओं का मानना है कि उनके दल को मंत्रिमंडल में पीडीपी के बराबरी का हिस्सा मिलना चाहिए। पीडीपी-भाजपा नेताओं में इसपर चर्चा का दौर भी जारी है। 

पीडीपी सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग भी नई दिल्ली में हैं और भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना दो अप्रैल को जम्मू आएंगे। यहां वह प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी की बैठक का विधिवत उद्घाटन करेंगे। साथ ही राम माधव की महबूबा मुफ्ती से मुलाकात भी संभव है।
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