मंगलवार को तीन तलाक के मुद्दे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक पीठ के तीन जजों ने इसे असंवैधानिक बताया था। जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस फली नरीमन, जस्टिस जोसेफ कुरियन ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए कहा था कि इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन होता है।
जबकि इससे पहले चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा था कि तीन तलाक धार्मिक प्रक्रिया और भावनाओं से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे एकदम से खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा था कि इस मुद्दे पर सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है संसद और केंद्र सरकार, उन्हें ही इस पर कानून बनाना चाहिए। सरकार को कानून बनाकर इस पर एक स्पष्ट दिशा निर्देश तय करने चाहिए।
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इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या आप मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के 'तीन तलाक' पर दिए फैसले से मुस्लिमों में तलाक के मामलों में कमी आएगी?
पोल के जवाब में हमें कुल 17,979 वोट मिले। इनमें 82.21 फीसदी (14,781 वोट) पाठकों ने हां में जवाब देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 'तीन तलाक' पर दिए फैसले के बाद मुस्लिमों में होने वाले तलाक के मामलों में कमी आएगी, जबकि14.67 फीसदी (2637 वोट) पाठकों ने माना कि सुप्रीम कोर्ट के 'तीन तलाक' पर दिए फैसले के बाद भी मुस्लिमों में तलाक में कमी नहीं आएगी। वहीं 3.12 फीसदी (561 वोट) पाठकों ने इस मुद्दे पर कोई राय जाहिर करने में असमर्थता जताई।