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Narendranath Dhar Dubey: पूर्व BSF डीआईजी ने जवानों से क्यों कहा था- कश्मीर में वर्दी पहनने का मतलब समझते हो?

Thu, 17 Apr 2025 09:16 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

पूर्व बीएसएफ डीआईजी नरेंद्र नाथ दुबे ने अपने सेवाकाल में एक बार जवानों से क्यों कहा था- कश्मीर में वर्दी पहनने का मतलब समझते हो क्या? आखिर जम्मू-कश्मीर में कैसे मंजर थे, जिसमें उन्हें ऐसा कहने पर मजबूर होना पड़ा। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के सामने आने वाली चुनौतियों और सेना उनसे कैसे निपटती है? इन सवालों पर भी पूर्व बीएसएफ डीआईजी ने विस्तार से जवाब दिया।
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अमर उजाला संवाद के मंच पर पूर्व बीएसएफ डीआईजी नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में पूर्व बीएसएस डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे ने बताया, 'कश्मीर में वर्दी पहनने का मतलब समझते हो क्या?' इस सवाल का कनेक्शन इस बात से है कि 2000-2003 के दौरान जितनी हिंसा और पुलिसकर्मियों की हत्याएं हुईं, इतना कभी नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि खुफिया विभाग के आंकड़े से उन्हें यह बात पता लगी। अगर आपने यूनिफॉर्म पहना है तो आपकी हत्या हो सकती है। चाहे वह सेना का जवान हो, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ या बीएसएफ का जवान हो, आतंकी डाउनटाउन श्रीनगर में सभी को साइलेंसर पिस्टल से शूट कर देते थे। कुक्कड़ बाजार, हब्बाकदल, लाल चौक और डल गेट जैसे इलाकों में आपको ड्यूटी करनी होती है।

आम नागरिकों की जान बचानी होती है
सिहरन पैदा करने वाला एक संस्मरण सुनाते हुए पूर्व डीआईजी ने कहा, 'हमारे एक जवान की जिंदगी केवल इसलिए बच गई क्योंकि उसने जाड़े की टोपी पहन रखी थी। इस कारण हेलमेट अच्छे से फिट नहीं था। पिस्टल सटा कर गोली मारी गई, लेकिन वो बच गया, क्योंकि हेलमेट शरीर से अलग था।' उन्होंने बताया जैश-ए-मोहम्मद की निगरानी में गाजी बाबा हत्याएं करा रहा था। संवेदनशील हालात में ये प्रस्ताव भी आया कि सुरक्षाबलों को भी सिविल ड्रेस में आतंकियों को जवाब देना चाहिए। इसकी कोशिशें हुईं, लेकिन अधिक कामयाबी नहीं मिली। जम्मू-कश्मीर में कोई भी प्रयोग आत्मघाती भी हो सकता है। सुरक्षाबलों पर अतिरिक्त जवाबदेही होती है, आम नागरिकों की जान बचानी होती है। जनहानि होने पर जवानों पर आरोप भी लगते हैं, लेकिन सुरक्षाबलों पर हमला हुआ है तो उन्हें बदला भी लेना है। ऐसे में ये दोधारी तलवार होती है।

ये भी पढ़ें- सेवानिवृत्त BSF डीआईजी नरेंद्रनाथ धर दुबे के पराक्रम की कहानियां
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अमर उजाला संवाद के मंच पर पूर्व बीएसएफ डीआईजी नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : अमर उजाला
सुरक्षाबल किसी भी हालत में कानून का उल्लंघन नहीं करते
साल 2017 में सेना के एक बड़े अधिकारी को जीप में बांधकर पत्थर मारे जाने की घटना का जिक्र होने पर पूर्व बीएसएफ डीआईजी ने कहा, वे किसी घटना विशेष पर चर्चा नहीं करेंगे। लेकिन जब सुरक्षाबल ड्यूटी के दौरान कोई एक्शन लेते हैं तो कई बार ऐसा भी होता है कि गलती से भी आम नागरिकों को भी नुकसान होता है। हर जवान को स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि क्या करना है क्या नहीं करना। सुरक्षाबल किसी भी हालत में कानून का उल्लंघन नहीं करते। आतंकियों का मकसद केवल लोगों को मारना होता है, लेकिन हमें जवाब देना होता है। सेना आतंकवादी नहीं बन सकती। गाजी बाबा का ऑपरेशन सबसे बड़ा उदाहरण है। श्रीनगर के बीचों-बीच हुए ऑपरेशन में एक भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा, केवल आतंकी मारे गए।

ये भी पढ़ें- Samwad 2025: पूर्व बीएसएफ DIG ने बताया, चुनौतियों को कैसे मात दी? घायल बेटे के पास 64 दिन बाद पहुंचे पिता...

सेना ने आतंकियों के लिए कब्र तैयार कर रखी है
गाजी नाम के पीछे की कहानी का जिक्र करते हुए डीआईजी ने कहा, फतह करने वाले शख्स और सर्वोच्च बताने के लिए इसका जिक्र होता है। जिस किताब में इसका जिक्र है, उसमें उपमा के तौर पर ऐसी भाषा लिखी गई है। हमारे लिए इसका वास्तविक अर्थ यही है कि चाहे जितने भी आतंकी हों, उन्हें आने दो, सेना ने उनके लिए कब्र तैयार कर रखी है।
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अमर उजाला संवाद के मंच पर पूर्व बीएसएफ डीआईजी नरेंद्र नाथ धर दुबे - फोटो : अमर उजाला
सुरक्षाबल किसी भी हालत में कानून का उल्लंघन नहीं करते
साल 2017 में सेना के एक बड़े अधिकारी को जीप में बांधकर पत्थर मारे जाने की घटना का जिक्र होने पर पूर्व बीएसएफ डीआईजी ने कहा, वे किसी घटना विशेष पर चर्चा नहीं करेंगे। लेकिन जब सुरक्षाबल ड्यूटी के दौरान कोई एक्शन लेते हैं तो कई बार ऐसा भी होता है कि गलती से भी आम नागरिकों को भी नुकसान होता है। हर जवान को स्पष्ट रूप से बताया जाता है कि क्या करना है क्या नहीं करना। सुरक्षाबल किसी भी हालत में कानून का उल्लंघन नहीं करते। आतंकियों का मकसद केवल लोगों को मारना होता है, लेकिन हमें जवाब देना होता है। सेना आतंकवादी नहीं बन सकती। गाजी बाबा का ऑपरेशन सबसे बड़ा उदाहरण है। श्रीनगर के बीचों-बीच हुए ऑपरेशन में एक भी नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचा, केवल आतंकी मारे गए।

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सेना ने आतंकियों के लिए कब्र तैयार कर रखी है
गाजी नाम के पीछे की कहानी का जिक्र करते हुए डीआईजी ने कहा, फतह करने वाले शख्स और सर्वोच्च बताने के लिए इसका जिक्र होता है। जिस किताब में इसका जिक्र है, उसमें उपमा के तौर पर ऐसी भाषा लिखी गई है। हमारे लिए इसका वास्तविक अर्थ यही है कि चाहे जितने भी आतंकी हों, उन्हें आने दो, सेना ने उनके लिए कब्र तैयार कर रखी है।
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