केंद्र की मोदी सरकार अब बिना यूपीएससी पास किए ही 'योग्य' लोगों को बड़े अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपने जा रही है। नए बदलाव के बाद न सिर्फ सरकारी, बल्कि निजी कंपनियों में काम करने वाले भी मंत्रालय के बड़े और अहम पदों पर बैठ सकेंगे। सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक इन लोगों की नियुक्ति मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर की जाएगी। विभाग ने दस मंत्रालयों में संयुक्त सचिव के लिए आवेदन मांगे हैं। इस नई चयन प्रक्रिया को 'लैटरल एंट्री' नाम दिया गया है।
सरकार का मकसद
सरकार ने यह बदलाव क्यों किया? इसका मकसद नोटिफिकेशन में बताया गया है। सरकार इसके जरिए प्रशासनिक कार्यप्रणाली में नए दृष्टिकोण और विचारों को लाना चाहती है। इसके लिए उन्होंने उन लोगों से आवेदन आमंत्रित किया है, जिन्हें उस खास क्षेत्र में दक्षता हासिल है। जॉइन्ट सेक्रेटरी का काम विभाग में प्रबंधन देखना होता है। वे नीति बनाने के साथ-साथ विभाग के अलग-अलग कार्यक्रमों और योजनाओं को लागू करने का काम करेंगे।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या बिना यूपीएससी की परीक्षा दिए पेशेवरों को अफसर बनाने का फैसला सही है?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 3635 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 32.27 फीसदी (1173 वोट) पाठकों ने माना कि बिना यूपीएससी की परीक्षा दिए पेशेवरों को अफसर बनाने का फैसला सही है। जबकि 67.73 फीसदी (2462) पाठकों ने माना कि बिना यूपीएससी की परीक्षा दिए पेशेवरों को अफसर बनाने का फैसला गलत है।