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अमर उजाला पोल: 45.41 फीसदी ने माना, जजों की नियुक्ति में देरी के लिए केंद्र जिम्मेदार

Sun, 27 Nov 2016 05:27 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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देश के उच्च न्यायालयों में जजों के 500 पद खाली पड़े हैं, इस पर चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर कई बार सरकार का ध्यान खींच चुके हैं। चीफ जस्टिस के मुताबिक रिक्त पदों पर नियुक्ति केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। चीफ जस्टिस की बात से ज्यादातर जनता भी इत्तेफाक रखती है और जजों की नियुक्ति में हो रही देरी के लिए केंद्र सकरार को ही जिम्मेदार मानती है।
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दरअसल, हाल ही में जजों की नियुक्ति को लेकर आए चीफ जस्टिस के बयान, उस पर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के पलटवार और अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी के लक्ष्मण रेखा वाले बयान के बाद अमर उजाला ने पोल कराकर पाठकों से इस मसले पर उनकी राय पूंछी। 

पाठकों से सवाल किया गया कि जजों की नियुक्ति में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है? सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़चढ़कर प्रतिक्रियाएं दी। सबसे ज्यादा 45.41 फीसदी (1976) पाठकों ने जजों की नियुक्ति में देरी के लिए ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ा। दूसरे नंबर पर 29.83 फीसदी (1298) पाठकों की राय में केंद्र सरकार और न्यायपालिका दोनों ही जजों की नियुक्ति न हो पाने के लिए जिम्मेदार हैं।
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महज 24.75 फीसदी (1077) पाठकों ने अकेले न्यायपालिका को जिम्मेदार बताया।

कुलमिलाकर जजों की नियुक्ति न सिर्फ अदालतों, बल्कि देश हित में काफी अहम है, इसको वाद-विवाद और राजनीति का मुद्दा न बनाकर अमल किया जाना बेहद जरूरी है, ताकि अदालतों में लंबित मामले निपटाने में तेजी आ सके। इससे देश की जनता का ही भला होगा। 
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