समलैंगिकता को अपराध मानने वाली आईपीसी की धारा 377 की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अपने फैसले में गुरुवार को कहा कि देश में सबको समानता का अधिकार है।
समाज की सोच बदलने की जरूरत है। अपना फैसला सुनाते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा, कोई भी अपने व्यक्तित्व से बच नहीं सकता है। समाज में हर किसी को जीने का अधिकार है और समाज हर किसी के लिए बेहतर है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए होमोसेक्सुएलिटी यानि समलैंगिकता को क्रिमिनल एक्ट बता चुका है जिसको दोबारा चुनौती देते हुए क्युरिटिव पिटिशन दाखिल की गई है।
इस विषय पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद समाज भी समलैंगिकता स्वीकार कर पाएगा?' सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 3350 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। 31.88 फीसदी (1068 वोट) पाठकों ने माना कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद समाज समलैंगिकता को स्वीकार कर लेगा। जबकि 68.12 फीसदी (2282 वोट) पाठकों ने माना कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी समाज समलैंगिकता स्वीकार नहीं कर पाएगा।