यूपी का सिरमौर बनने के बाद अमर उजाला ने अब सूबे के शहरों में भी बादशाहत कायम कर ली है। सूबे में कामयाबी के सिलसिले को जारी रखते हुए अखबार ने यहां के शहरों में भी अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को बुरी तरह पछाड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है।
राज्य के सभी प्रमुख शहरों में अमर उजाला ने नंबर-1 पोजीशन हासिल कर ली है। अमर उजाला राजधानी लखनऊ में लगातार दूसरी बार शिखर पर विराजमान हुआ है। यूपी की वाणिज्यिक राजधानी कानपुर और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में भी यह नंबर-1 अखबार है। आगरा, इलाहाबाद, मुरादाबाद और बरेली में भी यह सबसे आगे है।
अब तक अमर उजाला पश्चिमी यूपी में सबसे आगे था लेकिन अब पूर्वी और मध्य यूपी में इसके शीर्ष पर पहुंचने से अखबार की बढ़ती लोकप्रियता का पता चलता है। इतना ही नहीं, उत्तराखंड के देहरादून और हल्द्वानी मार्केट में भी अखबार सबसे आगे है।
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन यानी एबीसी के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई से दिसंबर, 2015 के दौरान अमर उजाला की प्रसार संख्या में जबरदस्त वृद्धि दर्ज हुई और यह 29.35 लाख कॉपियों की ऊंचाइयों तक जा पहुंची।
इस तरह जुलाई-दिसंबर, 2014 की तुलना में इसमें 29 फीसदी की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अमर उजाला की ब्रांड सक्रियता और प्रोडक्ट इनोवेशन की वजह से शहरों के पाठक अब इसकी ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय खबरों और विश्लेषणों के साथ उपयुक्त विज्ञापनों के जरिये अमर उजाला अपने प्रतिद्वंद्वी अखबारों से काफी आगे निकल चुका है। अमर उजाला की इस ग्रोथ स्टोरी का सबसे अहम पहलू हाई वैल्यू रीडरशिप में बढ़ोतरी होना है। अखबार के सभी प्रमुख बाजार और शहरों में यह ट्रेंड दिख रहा है।
अमर उजाला के डायरेक्टर प्रबल घोषाल ने कहा, ‘यूपी और उत्तराखंड के सभी प्रमुख शहरों में अमर उजाला का एक अहम आवाज बनकर उभरना जिंदगी में तरक्की चाहने वाले पाठकों पर लगातार ध्यान केंद्रित कर बनाई गई रणनीति का नतीजा है।
इस रणनीति के तहत लगातार ऐसे पाठकों पर फोकस बनाए रखा गया, जो महत्वाकांक्षी हैं। कंटेंट और विज्ञापनों के उपयुक्त तालमेल, प्रसार की दृष्टि से सही बाजारों पर फोकस और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को आवाज देकर अमर उजाला ने शहरी क्षेत्रों और राज्यों में अपनी बढ़त बना ली है।
एक भरोसेमंद और विश्वसनीय प्रोडक्ट की उभरती ताकत को आप सहज ही देख सकते हैं। साफ है कि हिंदी मीडिया में अमर उजाला एक नए उदाहरण के तौर पर उभर रहा है जो भारतीय मीडिया बाजार को नए सिरे से परिभाषित करने की क्षमता रखता है।