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Ground Report@Hyderabad: तेलंगाना की सबसे बड़ी लड़ाई, पूरे प्रदेश में जाएगा संदेश, मैदान में उतरे दिग्गज

Wed, 29 Nov 2023 05:54 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद

सार

असदुद्दीन ओवैसी के गढ़ हैदराबाद को लेकर सभी की उत्सुकता यह है कि बीआरएस को ओवैसी के समर्थन के बावजूद कांग्रेस शहर में खाता खोलने में सफल होगी या नहीं। साथ ही यह कि भाजपा पिछली बार के मुकाबले इस विधानसभा चुनाव में अपनी सीट संख्या बढ़ा पाने में कितनी सफल हो पाती है।
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Telangana Election 2023 - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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तेलंगाना में शहरों के मुकाबले चुनावी रंग गांवों में ज्यादा है, लेकिन हैदराबाद कुछ अलग है। पूरे प्रदेश का राजनीतिक संदेश यहीं से जाता है। शहर में दबदबा रखने वाली असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम 24 सीटों में से नौ पर लड़ रही है। पिछले चुनाव में यहां सात सीटों पर ओवैसी की पार्टी तो 16 पर बीआरएस ने बाजी मारी थी। भाजपा ने प्रदेश में यहीं की सीट गोशामहल से खाता खोला था। कांग्रेस को यहां कोई सीट नहीं मिली थी। ओवैसी का दखल कहीं दिखाई देता है तो यहीं पर। वह बाकी सीटों पर  बीआरएस का साथ देने का एलान कर चुके हैं।
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ओवैसी अपनी परंपरागत सात सीटों पर ही प्रमुखता से लड़ते हैं
पिछले लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र की चार सीटों में से हैदराबाद से एआईएमआईएम के ओवैसी, सिकंदराबाद से भाजपा के जी किशन रेड्डी ने बाजी मारी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी यहां के मल्काजगिरी से सांसद हैं और चिवडला में बीआरएस के रंजीत रेड्डी जीते थे। इन्हीं परिणामों ने अब सभी दलों के मन में उम्मीद बढ़ा दी है। कांग्रेस को लगता है कि वह इस बार यहां खाता जरूर खोलेगी तो भाजपा अपनी संख्या को गोशामहल से आगे बढ़ाना चाहती है। कहा तो यह भी जा रहा है कि ओवैसी अपनी परंपरागत सात सीटों पर ही प्रमुखता से लड़ते हैं। ओवैसी के समर्थकों की मानें तो उनकी सातों सीटों पर कोई टक्कर में नहीं है जबकि स्थानीय जानकारों का कहना है कि इस बार कोई एक या दो सीटें हाथ से जा भी सकती हैं।

असदुद्दीन ओवैसी के गढ़ हैदराबाद को लेकर सभी की उत्सुकता यह है कि बीआरएस को ओवैसी के समर्थन के बावजूद कांग्रेस शहर में खाता खोलने में सफल होगी या नहीं। साथ ही यह कि भाजपा पिछली बार के मुकाबले इस विधानसभा चुनाव में अपनी सीट संख्या बढ़ा पाने में कितनी सफल हो पाती है। तेलंगाना की राजधानी के जमीनी हालात पर नितिन यादव की रिपोर्ट...
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जुबली हिल्स : ओवैसी की नई पिच पर अजहरुद्दीन उलझे
जुबली हिल्स सीट को लेकर कांग्रेस प्रचार कर रही है कि गोशामहल में प्रत्याशी न उतारने वाले ओवैसी जुबली हिल्स में बीआरएस के प्रत्याशी के सामने भी चुनाव लड़ा रहे हैं। जबकि अन्य सीटों पर उनका बीआरएस को समर्थन है। यहां से कांग्रेस की ओर से पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान और मुरादाबाद के सांसद रहे अजहरुद्दीन मैदान में हैं। बीआरएस के विधायक पी गोपीनाथ फिर से ताल ठोक रहे हैं। एआईएमआईएम ने अपने पार्षद फराज को यहां से उतारा है। इस सीट पर 40 प्रतिशत मुस्लिम हैं। कांग्रेस का आरोप है कि बीआरएस को जितवाने के लिए ओवैसी ने दूसरा मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है। पिछले चुनाव में ओवैसी की पार्टी का यहां से कोई प्रत्याशी नहीं था।  

वोट बांटने वालों के मंसूबे कामयाब नहीं होंगे : अजहर
जुबली हिल्स की जनता जागरूक है। वह सारा खेल समझ रही है। कुछ लोग पिछले काफी चुनावों से सिर्फ बांटने की राजनीति कर रहे हैं। इस बार उनका मंसूबा कामयाब नहीं होगा। मुझे खुशी है कि अपनी जनता के बीच इतना प्यार मिल रहा है।

गोशामहल : भाजपा का गढ़ एआईएमआईएम का मुख्यालय यहीं, पर उनका प्रत्याशी नहीं
भाजपा के राजा सिंह ने पिछले चुनाव में पूरे प्रदेश में अपनी पार्टी के लिए एकमात्र हैदराबाद की सबसे चर्चित सीट गोशामहल जीती थी। खास बात यह है कि यहां पर एआईएमआईएम का मुख्यालय दारुस्लाम भी है। एआईएमआईएम ने प्रत्याशी नहीं उतारा है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी का कहना है कि धर्म पर अनुचित टिप्पणी करने वाले राजा सिंह के सामने ओवैसी प्रत्याशी खड़ा करने की हिम्मत नहीं दिखा पाए। हालांकि करीब 27 फीसदी मुस्लिम वोट यहां जिताने की स्थिति में रहते हैं। दो बार चुनाव जीतने के बाद राजा सिंह यहां से हैट्रिक बनाने की तैयारी में हैं। उनकी विवादित टिप्पणी के बाद हैदराबाद के आसपास काफी बवाल हुआ था और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। इतना ही नहीं भाजपा ने भी उन्हें निष्कासित कर दिया था।

राजा सिंह पर कुछ सालों पहले दो पादरियों की हत्या का भी आरोप लगा था, हालांकि इसमें वह बरी हो गए। कुछ सांप्रदायिक बवालों में राजा सिंह मुखर होने से पहचाने जाने लगे। वह हिंदू वाहिनी के भी सदस्य रहे हैं। उनके सामने बीआरएस के नंद किशोर व्यास उर्फ नंदू बिलाल और कांग्रेस से एडवोकेट सुनीता राव हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा और बीआरएस में ही है। एक युवा सोहैल का मानना है कि यहां पर मुस्लिम वोटर बीआरएस के साथ हैं। यहां सहारनपुर के लकड़ी कारोबारियों और राजस्थान से आए व्यापारियों की संख्या अच्छी खासी है। हार्डवेयर की दुकान चलाने वाले दीपक का कहना है कि यहां का चुनाव तो राजा सिंह के इर्द गिर्द ही घूमता है।

चंद्रायन गुट्टा : क्षेत्र में अकबरुद्दीन का जलवा
एआईएमआईएम के अकबरुद्दीन ओवैसी यहां से मैदान में हैं। यहां ओवैसी परिवार के दबदबे का अंदाजा लगाया जा सकता है। चाय की दुकान पर बैठे शारिक कहते हैं कि यहां आकर चुनाव के नतीजे जानने की जरूरत ही नहीं है। यहां पर कोई टक्कर में दिखता ही नहीं है। 70 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर अकबरुद्दीन चार बार विधायक रह चुके हैं। भाजपा के एक प्रत्याशी तो पहले ही पीछे हट चुके हैं। अब महेंद्र भाजपा, नागेश कांग्रेस और एमएस रेड्डी बीआरएस से मैदान में हैं।

चारमीनार : एआईएमआईएम ही हर बार जीती
शाम के समय मंदिर में आरती चल रही है और लोग पास ही विश्व प्रसिद्ध चारमीनार को निहार रहे हैं। एक कारोबारी मो. जाहिद अली का कहना है कि यह ओवैसी की ही सीट है।  एआईएमआईएम प्रत्याशी लोगों के बीच सक्रिय भी रहते हैं। उन्हीं के प्रत्याशी जीतते रहे हैं। विधायक मुमताज अली का टिकट काटकर पूर्व मेयर मीर जुल्फिकार अली को ओवैसी लड़ा रहे हैं। उनके सामने कांग्रेस से मुजीबल्लाह शरीफ और भाजपा की शोभा रानी अग्रवाल हैं। पिछली बार एआईएमआईएम और कांग्रेस के बीच अंतर महज 12 हजार का रह गया था। ऐसे में कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।

याकूतपुरा में भाजपा देगी मजबूत टक्कर
कई चुनावों से ओवैसी की पार्टी ही जीतती रही है। करीब 60 फीसदी मुस्लिम हैं। दो चुनावों में भाजपा दूसरे स्थान पर रही है। मजलिस बचाओ तहरीक के अमजुल्लाह खां और भाजपा के वीरेंद्र यादव एआईएमआईएम के जफर हुसैन मिराज को टक्कर दे रहे हैं।  

कारवान : गोलकुंडा का किला और चुनावी जोर
60 फीसदी से ज्यादा मुस्लिम वोटर हैं। प्रसिद्ध गोलकुंडा का किला भी यहीं है। इसी तरह यह ओवैसी की पार्टी का भी किला है। हालांकि एक बार भाजपा के बी रेड्डी चुनाव जीत चुके हैं। इस बार भाजपा प्रत्याशी अमर सिंह एआईएमआईएम के विधायक कौशर मुउद्दीन मजिलस के सामने हैं।

नामपल्ली में कांग्रेस को सबसे ज्यादा उम्मीद
सीट पर भी एआईएमआईएम का कब्जा रहा है। ओवैसी विरोधी आवाजों में अगुवा कांग्रेस के फिरोज खान एआईएमआईएम के प्रत्याशी माजिद हुसैन को हराने का दावा कर रहे हैं। वह पिछले तीन चुनावों में बहुत मामूली अंतर से हारेे हैं। इस बार मुस्लिमों का रुख कांग्रेस की ओर बढ़ा है।

बाकी की सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला
माहेश्वरम :
बीआरएस की शिक्षा मंत्री सविता रेड्डी के सामने कांग्रेस के लक्ष्मण रेड्डी और भाजपा के श्रीरामुलू यादव हैं। यहां 30% मुस्लिम और 20% यादव हैं। मुस्लिम वोटों के बंटवारे और यादवाें के सहारे भाजपा उम्मीद देख रही है।
मुशीराबाद : कांग्रेस ने सिकंदराबाद के पूर्व सांसद अंजन कुमार यादव पर दांव लगाया है। वर्तमान बीआरआरएस विधायक एम गोपाल और भाजपा प्रत्याशी पी राजू के सामने मुकाबला त्रिकोणीय बना हुआ है।
खैरताबाद : बीआरएस विधायक डी नागेंद्र फिर मैदान में हैं, लेकिन यहां पर इस बार कांग्रेस की पी विजया रेड्डी और भाजपा के सी रामचंद्र रेड्डी ने मुकाबले को अपने पाले में खींच लिया है।
सिकंदराबाद : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी सांसद हैं। उनकी साफ छवि के कारण उनकों यहां पर मुस्लिम मत भी मिलते रहे हैं। सिकंदराबाद सदर और सिकंदराबाद कैंट सीट को भाजपा अपने लिए अच्छा मानकर चल रही है।
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