दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि मनीष सिसोदिया सहित उनके तमाम नेताओं के विरुद्ध झूठे आरोपों में जांच की जा रही है। कोर्ट के सामने अब तक कोई साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका है, लेकिन इसके बाद भी उनके नेताओं पर एक-एक कर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इसे आम आदमी पार्टी को समाप्त करने की साजिश करार दिया है। वहीं, भाजपा ने कहा है कि स्वयं को कट्टर ईमानदार बताने वाली पार्टी के एक-एक नेता की कलई सामने आ रही है। सबको जेल जाना पड़ रहा है। केजरीवाल विक्टिम कार्ड खेलकर अपना भ्रष्टाचार छिपाना चाहते हैं।
मंगलवार को लगभग 12 घंटे की प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के बाद आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान ने बुधवार को अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की। इसके बाद मीडिया के सामने मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी पर जानबूझकर कार्रवाई की जा रही है जिससे आम आदमी पार्टी के विकास को रोका जा सके। लेकिन ऐसा नहीं होगा और पार्टी इन परिस्थितियों का मुकाबला करते हुए आगे बढ़ेगी।
क्या अदालतों पर भी प्रश्न खड़े कर रहे केजरीवाल: भाजपा
दिल्ली भाजपा नेता सारिका जैन ने अमर उजाला से कहा कि केजरीवाल केवल आरोपों की राजनीति करते रहे हैं। उनका कहना था कि सार्वजनिक जीवन में काम कर रहे लोगों पर आरोप लगने के बाद अदालत से निर्दोष सिद्ध होने तक उन्हें अपना पद छोड़ देना चाहिए। आज जब उनके नेताओं पर लगातार भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, वे उन्हें निर्दोष करार दे रहे हैं। अदालतें पर्याप्त साक्ष्य होने के कारण उनके नेताओं को जमानत तक नहीं दे रही हैं। क्या इससे नेताओं के आरोप सही साबित नहीं होते और क्या अरविंद केजरीवाल इसके बाद भी अपने नेताओं को ईमानदार कहकर अदालतों पर प्रश्नचिह्न नहीं खड़ा कर रहे हैं।
सारिका जैन ने कहा कि आम आदमी पार्टी को अब तक अपने मंत्रियों संदीप, इमरान हुसैन, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण मंत्रिमंडल से हटाना पड़ा है। अमानतुल्लाह खान पर भी जिस मामले मेें कार्रवाई हुई है, उस मामले में लंबे समय से जांच चल रही थी और पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उन पर कार्रवाई की गई है। ऐसे में अदालतों पर प्रश्न खड़ा करने की बजाय आम आदमी पार्टी नेता को जांच का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केजरीवाल हमेशा संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते रहे हैं। अदालतों पर प्रश्न थड़ा करके वे अदालतों का भी अपमान कर रहे हैं। उन्हें इस तरह की बयानबाजी से बचना चाहिए।