केरल मानव बलि मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों ने गुरुवार को एर्नाकुलम के न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट कोर्ट के 12 दिनों की पुलिस हिरासत के आदेश को चुनौती दी है। इन आरोपियों ने एर्नाकुलम के न्यायिक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के खिलाफ केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। केरल हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में उन्होंने पुलिस हिरासत देने के आदेश को रद्द करने की मांग की।
मिली जानकारी के मुताबिक तीनों आरोपियों ने याचिका के जरिए पूछताछ के दौरान अपने वकील से मिलने की अनुमति भी मांगी है। इसके अलावा मीडिया के माध्यम से आरोपी के बयान के विवरण को जारी नहीं करने देने की भी मांग की।
अंग माफिया की संभावना को पुलिस कर चुकी है खारिज
इससे पहले मंगलवार को कोच्चि पुलिस ने मामले में एक नया खुलासा किया था। पुलिस ने कहा था कि दो महिलाओं की मानव बलि के पीछे कोई अंग माफिया नहीं हैं। कोच्चि (शहर) के पुलिस आयुक्त सी.एच. नागराजू ने कहा, "हत्या के पीछे अंग माफिया होने के आरोप निराधार हैं। अस्वच्छ परिस्थितियों में अंग प्रत्यारोपण भी संभव नहीं है। यदि आप सामान्य जानकारी भी रखते हैं तो यह (मानव अंग) इसके काम नहीं आएंगे। इस बात का शक है कि मुख्य आरोपी मोहम्मद शफी ने सह-आरोपी को इस संबंध में गुमराह किया है।" पुलिस आयुक्त ने कहा कि आरोपी के खिलाफ अहम साइंटिफिक और टेक्नीकल सबूत हैं।
डीएनए सैंपल के लिए एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज ले जाए गए थे आरोपी
इससे पहले सोमवार को केरल के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एक परीक्षण किया और तीनों आरोपियों के डीएनए सैंपल एकत्र किया था। अधिकारियों ने कहा, एसआईटी मोहम्मद शफी, भगवल सिंह और लैला के रूप में पहचाने गए आरोपियों के सैंपल लेने के लिए उन्हें एर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज ले गई थी। पुलिस ने यहां आरोपियों का परीक्षण भी किया।
क्या है मामला
हाल ही में केरल के पथानामथिट्टा जिले में काला जादू के नाम पर दो महिलाओं की बलि देने का मामला सामने आया था। पुलिस के मुताबिक, आर्थिक मदद करने के नाम पर इन महिलाओं को बुलाया गया था। जिसके बाद उनका अपहरण किया गया और फिर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं, आरोपियों ने महिलाओं के शवों के टुकड़े-टुकड़े करके उन्हें जमीन में गाड़ दिया था। मामले में जांच के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
पैसा कमाने के लिए मानव बलि दी
पुलिस रिमांड रिपोर्ट के अनुसार, पति-पत्नी भगवल सिंह और लैला की जोड़ी ने मुख्य आरोपी मोहम्मद शफी के साथ मिलकर अपराध की साजिश रची थी। आरोपियों की पुलिस रिमांड रिपोर्ट में यह जिक्र किया गया है कि चौंकाने वाली मानव बलि को पैसा कमाने के लिए एक अनुष्ठान के हिस्से के रूप में पूरा किया गया था। पद्मा और रोसलिन के रूप में पहचानी गई दो मृतक महिलाओं के शवों को मंगलवार को भगवल सिंह और लैला के आवास के पास गड्ढों से निकाला गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पीड़िता को पैसे का झांसा देकर लालच दिया था।