भारतीय आयुध कारखानों के गौरवशाली इतिहास को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सरकार ने देश की 41 आयुध निर्माणियों को प्राइवेट हाथों में सौंपने का मन बना लिया है। आयुध निर्माणियों की कहानी यहीं पर खत्म नहीं हो जाती है। इस कहानी में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, देश के पूर्व पांच रक्षा मंत्री और लाखों गरीब किसान व आदिवासी भी शामिल हैं। आयुध निर्माणियों की 62 हजार एकड़ जमीन पर सरकार की नजर है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ के महासचिव सी.श्रीकुमार बताते हैं, आयुध निर्माणी मेदक और आयुध निर्माणी बड़माल के लिए तो पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने किसानों से खुद आग्रह कर जमीन मांगी थी। किसान आदिवासियों ने यह सोचकर कोड़ियों के भाव अपनी जमीन दे दी कि अब उनके बच्चों को रोजगार मिल जाएगा। इलाके का विकास हो सकेगा। देश के पांच पूर्व रक्षा मंत्रियों ने कहा था, आयुध कारखानों का निजीकरण नहीं होगा। अब इन्हें क्या जवाब दें। सेना का साजो सामान अब प्राइवेट कंपनियां तैयार करेंगी। बतौर सी. श्रीकुमार, निजीकरण की ये राह भारतीय सेना के लिए जोखिम का कारण बन सकती है।
किसानों और आदिवासियों के साथ धोखा
केंद्रीय कैबिनेट ने 16 जून को हुई बैठक में 220 साल पुराने आयुध कारखानों को सात कंपनियों में विभाजित कर दिया था। सरकार का कहना था कि ये सब कारखानों को आधुनिक बनाने के लिए किया गया है। इनका निजीकरण नहीं हो रहा है, बल्कि ये इनकी तरक्की की राह है। सी.श्रीकुमार कहते हैं, सरकार के प्रतिनिधि झूठ बोल रहे हैं। सरकार ने इन कारखानों को बेचने का निर्णय कर लिया है। अब इन्हें कंपनी बनाया गया है, कुछ दिन बाद निजी हाथों में सौंप देंगे। इसके अलावा सरकार यह कह कर कि ये कंपनियां तो घाटे में चल रही हैं, इसलिए इन्हें बंद किया जाता है। सरकार ने उन किसानों और आदिवासियों के साथ धोखा किया है, जिन्होंने अपनी कीमती जमीन इन कारखानों के लिए दी थी। अब सरकार ने एक बार भी उन किसानों और आदिवासियों से नहीं पूछा है कि क्या इन कारखानों का निजीकरण कर दिया जाए या नहीं। जिस वक्त उनकी जमीन ली गई तो वह कोड़ियों के दाम पर थी। आज उसी जमीन की कीमत करोड़ों अरबों रुपये है।
पांच रक्षा मंत्रियों ने कहा, कारखानों का निजीकरण नहीं होगा
बतौर श्रीकुमार, पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस, जसवंत सिंह, प्रणब मुखर्जी, एके एंटनी और मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि आयुध निर्माणियों का निजीकरण नहीं होगा। ये कारखाने पहले की भांति सेना को हथियार, गोला बारूद एवं दूसरा साजो सामान सप्लाई करते रहेंगे। रक्षा मंत्रियों का लिखित भरोसा हमारे पास है। ऐसे मिनट्स हैं, जिनमें साफ लिखा है कि ये कारखाने प्राइवेट नहीं होंगे। सप्लाई ऑर्डर पहले इन्हीं कारखानों को मिलेगा। चेन्नई के कारखाने में 1400 कर्मी हैं, जिनमें आठ सौ महिला कर्मी हैं। वहां पर आर्मी की यूनिफॉर्म बनती हैं। अगले साल से वह काम प्राइवेट कंपनी को दे दिया गया है। ऐसे में वे कर्मी कहां जाएंगे।
आयुध कारखानों की जमीन दो लाख करोड़ रुपये की है। सरकार की इसी जमीन पर नजर है। कारखानों को बंद कर सरकार अपने चहेते उद्योगपतियों को 62 हजार एकड़ जमीन कोड़ियों के भाव देना चाह रही है। पहले यह नियम था कि सेना जो भी सामान खरीदती है, उसका टेंडर आयुध कारखानों को मिलता था। यहां से एनओसी मिलने के बाद ही सेना किसी दूसरी जगह पर वह टेंडर जारी करती थी। अब यह नियम खत्म कर दिया गया है। इस मुद्दे पर कर्मचारी एसोसिएशन अदालत में जाने की तैयारी कर रही हैं। सरकार को हड़ताल का नोटिस भी दिया गया है।
सरकार ने बताया सुधारात्मक कदम
आयुध कारखानों को कंपनी में तब्दील करने के निर्णय को केंद्र सरकार ने एक सुधारात्मक कदम बताया है। आयुध कारखाना बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी गई है। इसके पीछे सरकार का मकसद है, आयुध कारखानों की क्षमता बढ़ाने के साथ साथ उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा के लिए तैयार करना है। मौजूदा स्थिति में बोर्ड के तहत संचालित हथियार और असलहा तैयार करने वाली 41 आयुध फैक्टरियों को आपस में विलय कर उन्हें सात कंपनियों में विभाजित कर दिया गया है। आयुध कारखानों में कार्यरत 70,000 कर्मचारियों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके जरिए रक्षा उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकेगी। ये कंपनियां रक्षा क्षेत्र के अन्य उपक्रमों की तरह ही होंगी। इनका संचालन पेशेवर प्रबंधन द्वारा होगा।
पंद्रहवें वित्त आयोग की रिपोर्ट में लिखा है कि रक्षा मंत्रालय ने अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें सेना के फार्म बंद कर उस भूमि का इस्तेमाल व्यावसायीकरण के लिए शुरू करना, परित्यक्त एयर फील्ड और कैंप लगाए जाने वाले मैदान व अधिक्रमित भूमि से भी धन जुटाया जा सकता है। श्रीकुमार ने बताया, ये कदम सेना के लिए ठीक नहीं हैं। विकसित देशों में गोला बारूद और सेना का दूसरा साजो सामान तैयार करना, ये सब सरकार के सीधे नियंत्रण में रहता है।