जब से सोनिया गांधी राजनीति में आईं हैं तब से उनका विदेशी मूल का मुद्दा विवाद और बहस का विषय रहा है। देश की आजादी के बाद से वह राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व करने वाली पहली विदेशी महिला हैं। सोनिया गांधी ने सबसे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष का पद संभाला था, जो भारतीय राजनीति में सबसे पुरानी और सबसे शक्तिशाली पार्टियों में से एक है।
उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यूपीए के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। यह गठबंधन लगातार दो बार केंद्र की सत्ता में था। सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी की सबसे लंबे समय तक रहने वाली अध्यक्ष हैं। आइए विस्तार से जानते हैं उनके बारे में:
- असली नाम: एंटोनिया एडविजे अल्बिना मेनो
- जन्मतिथि: नौ दिसंबर, 1946
- जन्मस्थान: लुसियाना, वेनेटो, इटली
- पिता का नाम: स्टेफानो मेनो
- माता का नाम: पाओला मेनो
- धर्म: रोमन कैथोलिक ईसाई
- नागरिकता: इटली (1946-1983), भारत (1983-वर्तमान)
- शिक्षा: कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री
- राजनीतिक सफर: 1998 में कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी गईं।
- लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र: रायबरेली, उत्तर प्रदेश
- पति: स्व.राजीव गांधी पूर्व प्रधानमंत्री
- विवाह का वर्ष: 1968
- बच्चे: दो
- बेटा: राहुल गांधी
- बेटी: प्रियंका गांधी
प्रारंभिक जीवन:
सोनिया गांधी का बचपन इटली के टूरिन शहर के नजदीक स्थित ऑर्बसानो नामक कस्बे में बीता था। जहां इनके पिता एक कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाते थे। उनका संबंध रोमन कैथोलिक परिवार से है। उन्होंने ओर्बसानो में एक कैथोलिक स्कूल में पढ़ाई की थी। इसके बाद अंग्रेजी और इंजीनियरिंग पढ़ने के लिए वो 1964 में कैम्ब्रिज चली गईं थीं। 1965 में उनकी मुलाकात राजीव गांधी से हुई। राजीव गांधी तब कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज में पढ़ रहे थे।
1968 में उन्होंने हिंदू रीति रिवाजों से राजीव गांधी के साथ विवाह किया। 1982 तक राजनीति में शामिल होने से पहले राजीव गांधी एक पेशेवर एयरलाइन पायलट थे। वहीं सोनिया गांधी एक गृहिणी के रूप में घर संभाल रहीं थीं।
राजनीति का रुख
राजीव गांधी से विवाह के बाद सोनिया गांधी लोगों के सामने आए बिना और राजनीति से दूर रहकर एक गृहिणी के रूप में शांत जीवन व्यतीत कर रहीं थीं। वो राजीव गांधी के राजनीति में जाने के खिलाफ थीं लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और राजीव देश के प्रधानमंत्री बन गए।
उनके साथ उन्होंने चुनाव प्रचार रैलियों में भी हिस्सा लिया था। 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद, सोनिया गांधी को पार्टी में शामिल होने और प्रधानमंत्री पद का पदभार संभालने के लिए आमंत्रित किया गया, जिसे उन्होंने मना कर दिया था। उनके मना करने के बाद पार्टी ने पीवी नरसिम्हा राव को अपना नेता और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में चुना।
1996 में कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद पी चिदंबरम, माधवराव सिंधिया, अर्जुन सिंह, राजेश पायलट और ममता बनर्जी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी के नेतृत्व पर सवाल उठाया था। इन नेताओं ने कांग्रेस छोड़कर अपने अलग अलग राजनीतिक दल भी बनाए थे।
1997 में कलकत्ता में पार्टी का पूर्ण अधिवेशन बुलाया गया और उसमें सोनिया गांधी को पार्टी में शामिल किया गया। इसके बाद 1998 में वह पार्टी अध्यक्ष बन गईं।
खास बातें
- प्राथमिक सदस्य के रूप में पार्टी में शामिल होने के 62 दिनों के भीतर सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं थीं।
- 1999 में उन्होंने कर्नाटक के बेल्लारी में भाजपा नेता सुषमा स्वराज को हराकर लोकसभा चुनाव जीता था।
- वह दो बार (2004 और 2009) उत्तर प्रदेश के रायबरेली से लोकसभा सदस्य के रूप में चुनी गईं।
- सोनिया गांधी सबसे लंबे समय तक कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। वह 1998 से 2017 तक इस पद पर रहीं।
- इसके बाद उनके बेटे राहुल गांधी ने यह पद संभाला।
- 2019 में लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी जीत का स्वाद नहीं चख सकी और इसे अपनी नैतिक जिम्मेदारी मानते हुए राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
- राहुल के इस्तीफे के बाद सोनिया गांधी को पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया।