असम जातीय परिषद (एजेपी) सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही है। शनिवार को एजेपी अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने जोर देकर कहा कि अगर सरकार अंग्रेजी में भी शिक्षा को बढ़ावा देना चाहती है, तो उन्हें इसके लिए अलग नीति बनानी चाहिए और असमिया और अन्य स्थानीय माध्यम स्कूलों के डोमेन पर अतिक्रमण नहीं करना चाहिए।
असम सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में असमिया, बोडो या बंगाली के बजाय अंग्रेजी माध्यम में गणित और विज्ञान की पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले के अगले दिन ही असम जातीय परिषद (एजेपी) ने इसके विरोध में आ गई है। विपक्षी दल ने दावा किया कि इस तरह का निर्णय शिक्षा को मातृभाषा में प्रोत्साहित करने की विश्व स्तर पर स्वीकृत प्रथा के विपरीत है।
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दरअसल, बीजेपी नेतृत्व वाली असम सरकार ने सभी सरकारी और प्रांतीय असमिया और अन्य स्थानीय भाषा के स्कूलों में के अगले शैक्षणिक सत्र से अंग्रेजी भाषा में गणित और विज्ञान पढ़ाने के फैसला किया है। गुरुवार को सीएम की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कक्षा 3 से अंग्रेजी में गणित और विज्ञान पढ़ाने का निर्णय लिया गया। निर्णय के मुताबिक, कक्षा 3 से 12 तक सभी सरकारी स्कूलों में साइंस और मैथ्समेटिक्स अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाया जाएगा, न कि असमिया, बोडो, बंगाली या अन्य भाषाओं में।
असम जातीय परिषद (एजेपी) सरकार के इस फैसले का विरोध कर रही है। शनिवार को एजेपी अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई ने कहा कि इसके पीछे सरकार का तर्क है कि यह अखिल भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं में हमारे छात्रों द्वारा बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस तर्क के पीछे कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि असमिया माध्यम और अन्य स्थानीय माध्यम के स्कूलों के छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों और दुनिया भर में बहुत कुछ हासिल किया है।
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उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर सरकार अंग्रेजी में भी शिक्षा को बढ़ावा देना चाहती है, तो उन्हें इसके लिए अलग नीति बनानी चाहिए और असमिया और अन्य स्थानीय माध्यम स्कूलों के डोमेन पर अतिक्रमण नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किया जाता है कि प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पैनल ने मातृभाषा में कॉलेज स्तर की शिक्षा का सुझाव दिया है।