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आईएनएस विक्रमादित्य में लगी आग बुझाते हुए शहीद हो गए रतलाम के लेफ्टिनेंट कमांडर चौहान

Sat, 27 Apr 2019 07:31 AM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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INS विक्रमादित्य - फोटो : The Forthright
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देश के सबसे बड़े विमानवाहक जंगी पोत आईएनएस विक्रमादित्य में शुक्रवार को आग लग गई। आग बुझाने के दौरान धुएं के कारण अचेत हुए नौसेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान शहीद हो गए। आग शुक्रवार सुबह उस समय लगी, जब पोत कर्नाटक के कारवाड़ बंदरगाह पहुंच रहा था। नौसेना ने बताया कि पोत को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। डीएस चौहान मध्य प्रदेश के रतलाम के रहने वाले थे।

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नौसेना ने जांच के लिए 'बोर्ड ऑफ इन्क्वॉयरी' के आदेश दिए हैं। नौसेना के प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि लेफ्टिनेंट कमांडर चौहान की बहादुरी से आग को बुझा लिया गया। हम उनके साहस औैर कर्तव्यनिष्ठा को सलाम करते हैं। 

284 मीटर लंबा और 60 मीटर ऊंचा है पोत : आईएनएस विक्रमादित्य को रूस से करीब 16,000 करोड़ रुपए में खरीदा गया था। यह 284 मीटर लंबा और 60 मीटर ऊंचा है। सम्राट विक्रमादित्य के सम्मान में इसका नामकरण किया गया।

रोते हुए मां बोलीं- मेरा बेटा भारत के लिए शहीद हुआ है

कभी शहीद बेटे धर्मेंद्र की यूनिफॉर्म की टोपी को चूमती हैं, तो कभी उसकी तस्वीर के सामने जाकर सैल्यूट करने लगती हैं। इकलौते बेटे के खोने का गम है तो साथ में गर्व भी। जब भी कोई घर में आता है कह उठती हैं नजरें झुकाकर मत आओ, नमस्ते की बजाए पहले सेल्यूट करो, मेरा बेटा भारत माता के लिए शहीद हुआ है।

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ये हाल है कारवार (कर्नाटक) स्थित हार्बर में आईएनएस विक्रमादित्य पोत में लगी आग बुझाने की कोशिश में शहीद हुए लेफ्टिनेंट कमांडर धर्मेंद्र सिंह चौहान की मां टमा कुंवर का, जो फिलहाल रिद्धी-सिद्धी कालोनी घर में अकेली हैं। शहीद बेटे की 10 मार्च को ही आगरा में वहीं की रहने वाली करुणा सिंह से शादी हुई थी। 12 मार्च को रतलाम में रिसेप्शन हुआ था।

मां ने बताया वो एयरफोर्स में जाना चाहता था लेकिन 2012 में नेवी में सिलेक्शन हो गया। दोपहर लगभग 1.30 बजे जब मां टमा कुंवर को बेटे के शहीद होने की जानकारी मिली तब वो खाना खा रही थीं। पहले आगरा से बहू करूणासिंह ने फोन कर बताया आपके बेटे का एक्सीडेंट हो गया है, वो आईसीयू में हैं। मैं जा रही हूं आप भी निकलो।

इसके कुछ ही मिनटों बाद नेवी आफिसर का फोन आया उन्होंने धर्मेंद्र के शहीद होने की सूचना दी। इसके बाद से ही मां बेसूध है। पत्नी करूणा सिंह को तो अब तक पता नहीं की उसका पति शहीद हो चुका है। वो भाई के साथ हवाई जहाज से कारवार के लिए रवाना हो गई है।



शहीद लेफ्टिनेंट कमांडर डीएस चौहान , फोटो- एएनआई

आईएनएस विक्रमादित्य की खासियत

रूस के युद्धपोत एडमिरल गोर्शकोव को ही नौसेना ने आईएनएस विक्रमादित्य नाम दिया गया है। विक्रमादित्य  एक तरह से तैरता हुआ शहर है। यह लगातार 45 दिन समुद्र में रह सकता है। इसकी हवाई पट्टी 284 मीटर लंबी और अधिकतम 60 मीटर चौड़ी है। इसका आकार तीन फुटबॉल ग्राउंड के बराबर है।
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15 हजार करोड़ रुपए की लागत से बने विक्रमादित्य पर 30 लड़ाकू विमान, टोही हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं। विक्रमादित्य पर कुल 22 डेक हैं। एक बार में 1600 से ज्यादा जवान इस पर तैनात किए जा सकते हैं। इस पर लगे जेनरेटर से 18 मेगावाट बिजली मिलती है। इसमें समुद्री पानी को साफ कर पीने लायक बनाने वाला ऑस्मोसिस प्लांट भी लगा है।
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