सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की पूर्व महिला कर्मचारी शुक्रवार को पहली बार इनहाउस जांच समिति के सामने पेश हुई। दूसरे सबसे सीनियर जज जस्टिस एसए बोबडे के नेतृत्व में तीन जजों की समिति ने बंद कमरे में उसका पक्ष सुना। महिला के अलावा कोई और सुनवाई का हिस्सा नहीं था। उसके साथ आए वकील भी सुनवाई में शामिल नहीं थे।
सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में एक फैसले में कहा था कि आरबीआई को बैंकों की सालाना ऑडिट रिपोर्ट, एनपीए की स्थिति व उस पर की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करनी है। कोर्ट ने सूचना के अधिकार कानून के तहत एनपीए के बारे में बताने का भी निर्देश दिया था, लेकिन इसके बाद रिजर्व बैंक ने डिस्क्लोजर के नियम जारी किए। इसमें आरटीआई के तहत बैंकों की आर्थिक सेहत के बारे में जानकारी देने पर रोक लगा दी गई।
आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल व गिरीश मित्तल की अवमानना याचिका के अनुसार उन्होंने दिसंबर 2015 में आरटीआई कानून के तहत एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक व एचडीएफसी बैंक की जांच रिपोर्ट की प्रति मांगी थी। आरबीआई ने नियम का हवाला देते हुए जांच रिपोर्ट देने से मना कर दिया।