दिल्ली में वायुप्रदूषण
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दिल्ली की हवा, जो आमतौर पर 'बहुत खराब' श्रेणी में रहती है, दिवाली के अगले दिन उसकी हवा की गुणवत्ता 506 थी। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और सफर (एसएएफएआर) के अनुसार दिल्ली विश्वविद्यालय क्षेत्र में मंगलवार को हवा की गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में थी और यह 740 की रेखा को छू रही थी। 'गंभीर' श्रेणी हमें यह पता चलता है कि हवा से बीमार लोगों के साथ-साथ स्वस्थ लोगों पर भी इसका असर पड़ता है।
साल 2018 में दिवाली से पहले ही उत्तर भारत के अधिकतर शहरों में 'गंभीर' श्रेणी की हवा बह रही थी, तब हवा की गुणवत्ता 400 के पार पहुंच गई थी। इस साल सर्दियों के देर से आने और हवा के अच्छे बहाव ने प्रदूषित कणों को तितर-बितर कर दिया है, लेकिन हवा की गुणवत्ता अभी भी बहुत खराब है।
सीएसई द्वारा की गई दिल्ली की हवा के विश्लेषण से पता चला कि दिवाली के दिन शाम पांच बजे से एक बजे के बीच PM 2.5 की सांद्रता में दस गुना उछाल देखा गया, जिसका मुख्य कारण पटाखे फोड़ना था।
PM 2.5 बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह न केवल फेफड़ों को प्रभावित करता है, बल्कि रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकता है। सीएसई की रॉयचौधरी ने बताया कि इस साल, 2018 के विपरीत सर्दियां अभी तक पूरी तरह से नहीं आई हैं और मौसम अपेक्षाकृत अनुकूल था। यह एक गर्म और बेहतर दिवाली थी।
सफर (एसएएफएआर) के अनुसार, पश्चिमी तट पर चक्रवात क्यार की वजह से हो रही बारिश के चलते मुंबई ने पिछले पांच वर्षों में दिवाली के दिन सबसे साफ हवा का आनंद लिया। मुंबई में रविवार को दिवाली का दिन PM 2.5, 35 पर था, जो 'संतोषजनक' श्रेणी में आता है। दिवाली के अगले दिन PM 2.5, 48 तक पहुंच गई। मंगलवार दोपहर तक, PM 2.5, 53 पर थी, जिसे संतोषजनक स्थिति माना जाता है।
दिल्ली में वायुप्रदूषण
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सफर (एसएएफएआर) की वेबसाइट ने बताया कि क्यार चक्रवात की वजह से हो रही बारिश के चलते मुंबई की हवा सुरक्षित स्तर पर बनी रही। वेबसाइट ने आगे बताया कि हवा के धीरे होने से तापमान ठंडा होने लगा, साथ ही वातावरण में नमी की मात्रा ने प्रदूषण के स्तर को नियंत्रण में रखने में मदद की। मॉनसून की गति में अचानक बदलाव ने दिवाली के दिन हुई आतिशबाजी के बावजूद हवा की गुणवत्ता को संतोषजनक श्रेणी में रखने के लिए सकारात्मक रूप से काम किया।
ग्लोबल स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस काउंसिल की निदेशक आरती खोसला ने कहा कि मुंबई के हवा के साफ होने के पीछे दो कारण हैं। जिसमें पहला कारण यह है कि दिवाली से पहले महाराष्ट्र और गोवा दोनों राज्यों में भारी बारिश हुई जिससे हवा साफ हो गई।
वहीं दूसरी कारण यह है कि लोगों ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल लोगों ने कम पटाखे फोड़े। तो हम यह कह सकते हैं कि लोगों द्वारा प्रदूषण की समस्या को स्वीकार कर कम पटाखे फोड़ने और मौसम संबंधी स्थितियों का एक संयोजन है, जिस कारण हवा साफ रही।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार बंगलूरू में आमतौर पर वायु गुणवत्ता 'अच्छा' या 'संतोषजनक' रहती है। लेकिन सोमवार को यह 100 के आंकड़े को पार करते हुए 'मध्यम' श्रेणी में पहुंच गया। जिससे श्वसन और हृदय रोगों से पीड़ित लोगों को सांस लेने में परेशानी हो शुरू हो गई।